कानपुर। कानपुर नगर निगम में मेयर और भाजपा पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब सरकार तक पहुंच गया है। भाजपा के कुछ पार्षद खुले तौर पर मेयर के खिलाफ खड़े हैं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पार्षदों ने मेयर के बेटे पर भी आरोप लगाए हैं।
उत्तर इकाई के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने इस विवाद को सुलझाने की कोशिश करते हुए दोनों पक्षों से बातचीत की थी। अब इस मामले में प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय सीधे हस्तक्षेप करेंगे। मंत्री 4 जनवरी को अटल बिहारी बाजपेयी की जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर कानपुर में आयोजित होने वाली गोष्ठी में शामिल होने आएंगे। इस कार्यक्रम के दौरान वह मेयर और पार्षदों से बातचीत कर विवाद सुलझाने की कोशिश करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में चल रहे विवाद को देखते हुए सरकार ने सीधे हस्तक्षेप किया है। प्रभारी मंत्री को कानपुर भेजने का मुख्य उद्देश्य यही है कि पार्टी की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके और मेयर-पार्षद विवाद को समाप्त किया जा सके।
इस विवाद के कारण नगर निगम में कामकाज भी प्रभावित हो रहा है और भाजपा की स्थानीय छवि पर भी असर पड़ा है। अब देखना होगा कि मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की बैठक के बाद इस मामले का क्या हल निकलता है।








