शिक्षा की नींव रखने वालों की आवाज़ गूंजेगी 1 मई को – होगा बड़ा आंदोलन

  • शिक्षकों की आवाज़ अब होगी बुलंद – 1 मई को होगा निर्णायक प्रदर्शन
  • वेतन, पदोन्नति और स्थानांतरण की पारदर्शिता की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेंगे शिक्षक
  • लखनऊ बैठक में तय हुई आंदोलन की रूपरेखा, जनपद स्तर पर रणनीति तय करने की तैयारी

अम्बेडकरनगर। प्राथमिक शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर जनपद के शिक्षक 1 मई को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान शिक्षकों की उपेक्षित मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसे जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा।

लंबे समय से लंबित हैं मांगें

संघ के जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि यह आंदोलन अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि शासन-प्रशासन का ध्यान खींचने का अंतिम प्रयास है। उन्होंने कहा, “हमारी मांगें वर्षों से लटकी हुई हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब शिक्षक चुप नहीं बैठेंगे।”

आंदोलन की तैयारी के लिए 22 अप्रैल को जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय पर एक बैठक बुलाई गई है, जिसमें जिला कार्यसमिति, ब्लॉक अध्यक्ष और मंत्री शामिल होंगे। इस बैठक में धरने की रणनीति और कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

विशिष्ट बीटीसी 2004, बीटीसी 2001 और 2004 बैच के शिक्षकों की नियुक्ति और वेतनमान से जुड़ी विसंगतियों को दूर करना।

1 अप्रैल 2005 से पहले विज्ञापित हुई भर्तियों में नियुक्त शिक्षकों को उचित वेतन एवं पदोन्नति का लाभ देना।

वरिष्ठता की उपेक्षा, पदोन्नति में देरी और स्थानांतरण नीति में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।

समय पर वेतन और अन्य मौलिक सुविधाएं प्रदान करना।

“शिक्षकों की उपेक्षा देश के भविष्य के साथ खिलवाड़”

शिक्षक संघ का कहना है कि प्रदेश के लाखों शिक्षक वर्षों से अन्याय झेल रहे हैं। “यदि शिक्षकों का मनोबल टूटेगा, तो शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी? सरकार को हमारी मांगों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए,” एक शिक्षक ने नाराजगी जताई।

लखनऊ में हुई थी बैठक, सभी जिलों में एक साथ आंदोलन

इससे पहले लखनऊ में हुई बैठक में प्रदेश के सभी जिलों में 1 मई को धरना देने का निर्णय लिया गया था। शिक्षक संघ के नेताओं ने इसे “निर्णायक संघर्ष” बताते हुए कहा कि अब शिक्षकों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

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