सम्मान समारोह में तिवारी जी भड़क गये…

लखनऊ। आज चौधरी चरण सिंह सहकारिता भवन में सवर्ण महासंघ फाउण्डेशन का कार्यक्रम था। सवर्ण महासंघ फाउण्डेशन ने जहां खुले मंच से ऐलान किया कि “सवर्ण आयोग नहीं तो वोट नहीं” वहीं पत्रकारों को समृति चिन्ह देकर सम्मान दिए जाने के समय एक वरिष्ठ सुयोग्य पत्रकार अपने तिवारी जी भड़क गये और समारोह से उठकर हाल के बाहर चले गये जिन्हें महासंघ के अध्यक्ष जी बाद में मना कर मंच पर ले गये और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान पत्र दिया। समाचार लिखने के पूर्व सन्दर्भ के साथ बता ‘दूँ कि मेरे पास सबसे बड़ा सम्मान यह है कि मुझे आज तक कोई सरकारी, अर्ध-सरकारी या गैर-सरकारी समृति चिन्ह या सम्मान पत्र नहीं प्राप्त हुआ है’।

राजधानी लखनऊ शहर में आजकल पत्रकार संगठनों-पत्रकारों में समृति चिन्ह देकर सम्मान लेने-देने का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। किन्हीं-किन्हीं आम समारोहों में तो पत्रकार संगठन द्वारा पूरे समारोह को ही हाईजैक कर लिया जाता है जिसमें मूल समारोह ‘गायब’ हो जाता है और खुद के समाचार पत्रों में उन्हीं को मिले सम्मान की गाथा लिखकर फोटो छाप दी जाती है। बहरहाल आज मौका था चौधरी चरण सिंह सहकारिता भवन में आयोजित सवर्ण महासंघ फाउण्डेशन के एक कार्यक्रम का। कार्यक्रम के अन्त में वरिष्ठ, उच्च पदस्थ एवं सम्मानीय पत्रकारों को समृति चिन्ह देकर सम्मान पत्र दिए जाने का। यह सम्मान महासंघ फाउण्डेशन के अध्यक्ष जी के कर कमलों से दिया जाना था। उद्घोषक महोदय सज्जन क्रम मे उन्हीं पत्रकारों के नाम की घोषणा क्रमवार कर रहे थे जिन्हें एक पत्रकार महोदय इंगित कर रहे थे। सबसे पहले पत्रकार के इशारे पर उद्घोषक ने पत्रकार दूबे जी का नाम पुकारा। महासंघ के अध्यक्ष जी ने जैसे ही पत्रकार दूबे जी को अपने कर कमलों से स्मृति चिन्ह देकर सम्मान पत्र देने लगे तभी एकाएक पत्रकार तिवारी जी भड़क गये और मिन्नत के साथ रोके जाने के बाद भी समारोह हाल से बाहर चले गये। बाद में तिवारी जी के भड़कने का कारण पता लगा। मामला यह हुआ कि उद्घोषक को सबसे पहले पत्रकार दूबे जी का नाम पुकारे जाने को लेकर  पत्रकार तिवारी जी को नागवार गुजरा। मामला “तू बड़ा कि मैं बड़ा”।

यहां झगड़ा यह मचा कि सबसे ज्यादा सम्माननीय, वरिष्ठ पत्रकार तिवारी जी थे या दुबे जी? अब इसमें उद्घोषक की क्या गलती? उद्घोषक के साथ खड़े पत्रकार जी जो क्रम बता रहे थे उद्घोषक जी वही नाम बुला रहे थे। बस यहीं पर उद्घोषक से गलती हो गई और वह तिवारी जी के पहले दूबे जी के नाम की उद्घोषणा कर बैठे। फिलहाल जहां तिवारी जी पीठ दिखा कर समारोह हाल से बाहर चले गये वहीं अपने दूबे जी मंद-मंद मुस्काते अगली पंक्ति की सीट पर जाकर बैठ गये। इस समारोह में बहरहाल पत्रकार दूबे जी पत्रकार तिवारी जी से वरिष्ठ पत्रकार साबित हुए। अफरा-तफरी के इस माहौल में अचकचाए महासंघ फाउण्डेशन के अध्यक्ष जी पत्रकार तिवारी जी के पीछे-पीछे अपने सहयोगियों के साथ बाहर लपक कर गये और हाथ-पैर जोड़कर किसी तरह पत्रकार तिवारी जी को समारोह हाल के अन्दर मंच पर लेकर आये तथा समृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मान पत्र दिया मगर वरिष्ठ का तमगा तो दूबे जी के सिर का सेहरा आज बन ही गया।

इस समारोह में इन झगड़ों-रगड़ों से दूर अपने पत्रकार मिश्रा जी समृति चिन्ह और सम्मान पत्र के साथ मंद-मंद मुस्कराते हुए मजे से घटनाक्रम देखते रहे। आज इस समारोह में दर्जन भर मिश्रा जी, तिवारी जी, दूबे जी, ही सम्मानित हुए। कई कलम के सवर्ण पुरोधा अगले कार्यक्रम के इंतजार में अभी भी है। सम्मान व्यक्ति से बड़ा होता है, किन्तु समारोह में “तू बड़ा कि मैं बड़ा” के दम्भ में पत्रकार महोदय ने मिल रहे समृति चिन्ह और सम्मान को अपने ठेंगे पर रक्खा और कुर्सी से कूद कर समारोह से बाहर चले गये। मौजूद पत्रकारों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया। वह तो महासंघ के आयोजकों एवं अध्यक्ष ने तूल पकड़ रहे इस मामले को किसी तरह सम्भाल लिया।

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