- डोनाल्ड ट्रम्प ने मस्क पर सब्सिडी लेने का आरोप लगाया।
- मस्क बोले – NASA के कॉन्ट्रैक्ट्स हमने मेहनत और कम लागत पर जीते।
- ट्रम्प ने चेताया – सब्सिडी हटाने से मस्क की कंपनियां बंद हो जाएंगी।
वाशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और टेस्ला व स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क के बीच सब्सिडी को लेकर विवाद तेज हो गया है। ट्रम्प ने दावा किया कि मस्क की कंपनियों को अमेरिकी सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है और अगर ये सब्सिडी बंद कर दी जाए, तो मस्क को अपनी कंपनियां बंद कर दक्षिण अफ्रीका लौटना पड़ेगा।
ट्रम्प ने कहा, “अगर मैं चाहता, तो सब्सिडी खत्म करके मस्क की पूरी दुकान बंद कर सकता था। ना टेस्ला कार बनती, ना स्पेसएक्स के रॉकेट उड़ते।”
इसके जवाब में एलन मस्क ने कहा कि सरकारी सब्सिडी का दावा झूठा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पेसएक्स को जो भी कॉन्ट्रैक्ट्स मिले हैं, वो बेहतर क्वालिटी और कम कीमत के आधार पर हासिल किए गए हैं। मस्क ने चेतावनी दी कि अगर NASA के कॉन्ट्रैक्ट्स रद्द किए गए, तो अंतरिक्ष यात्रियों का मिशन बीच में रुक सकता है।
विवाद की वजह: बिग ब्यूटिफुल बिल
इस जुबानी जंग की शुरुआत ‘बिग ब्यूटिफुल बिल’ को लेकर हुई, जिसका मस्क ने खुलकर विरोध किया था। उनका कहना था कि यह बिल अमेरिका के कर्ज को और बढ़ाएगा और इससे लाखों लोगों की नौकरियां खत्म हो सकती हैं। मस्क का कहना था कि इस कानून से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।
ट्रम्प ने पलटवार करते हुए कहा कि मस्क को बिल की जानकारी थी, लेकिन उन्हें आपत्ति तब हुई जब EV सब्सिडी में कटौती करने का निर्णय लिया गया, क्योंकि इसमें अरबों डॉलर का खर्च आ रहा था।
पुरानी दोस्ती में आई दरार
एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच पहले अच्छे संबंध माने जाते थे। मस्क ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान उनके चुनाव प्रचार के बड़े समर्थक और दानदाता थे। लेकिन बाद में जब मस्क ने उनके प्रशासन से खुद को अलग कर लिया, तभी से रिश्ते में दरार आ गई।
हकीकत क्या है? – वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि पिछले करीब 20 वर्षों में मस्क की कंपनियों को अमेरिकी सरकार से 38 अरब डॉलर (करीब 3.2 लाख करोड़ रुपये) की मदद मिली है। इसमें सब्सिडी, टैक्स क्रेडिट, लोन और कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल हैं।
हालांकि, मस्क का दावा है कि स्पेसएक्स को मिले NASA के कॉन्ट्रैक्ट्स सब्सिडी नहीं हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया में उन्हें बेहतर सेवा और लागत के आधार पर ये मिले हैं।








