- अल्ट्रासाउंड मशीन चालू, स्टाफ भी तैनात फिर भी देरी
- गर्भवती महिलाओं और शिशुओं को नहीं मिल रही समय पर जांच
- गरीब मरीज निजी केंद्रों पर मजबूरी में करा रहे जांच
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों को 8 से 10 दिन तक का इंतजार करना पड़ रहा है। अत्यंत गंभीर, गर्भवती और शिशु रोगियों को भी समय पर जांच सुविधा नहीं मिल पा रही है। आलम यह है कि मजबूरी में हजारों मरीज निजी जांच केंद्रों का रुख कर रहे हैं, जहां भारी शुल्क चुकाना उनकी विवशता बन गया है।
उपकरण भी है, स्टाफ भी है फिर भी देरी क्यों?
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन कार्यशील स्थिति में है और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ भी तैनात है, इसके बावजूद मरीजों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही। स्थिति यह है कि रोजाना सुबह से लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन सीमित संख्या में पर्चियां काटे जाने के कारण अधिकतर मरीजों को अगली तारीख दी जा रही है।
गर्भवती महिलाएं हो रही सबसे ज्यादा प्रभावित
अस्पताल में प्रतिदिन आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए दस दिन बाद की तिथि दी जा रही है। नियमानुसार गर्भवती महिलाओं की जांचों का समय निर्धारण चिकित्सकीय दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक होता है, ऐसे में देरी से जटिलताएं बढ़ने का खतरा बना रहता है।
गरीब मरीजों पर दोहरी मार
जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए कई बार आना पड़ रहा है। कई बार तो उन्हें तीन-चार दिन बाद ही पता चलता है कि जांच की तिथि आगे की जा चुकी है। मजबूरी में वे निजी जांच केंद्रों का सहारा लेते हैं, जहां उन्हें 600 से 1200 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं।








