प्राइमरी स्कूलों के मर्जर पर यूपी सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में प्राइमरी स्कूलों के मर्जर को लेकर एक अहम और राहतभरा निर्णय लिया है। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित किसी भी स्कूल का मर्जर नहीं किया जाएगा, साथ ही 50 या इससे अधिक छात्रों वाले स्कूलों को भी मर्ज नहीं किया जाएगा

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो स्कूल पहले से मर्ज हो चुके हैं और ये मानक उन पर लागू होते हैं, उन्हें “अनपेयर” यानी पुनः स्वतंत्र किया जाएगा। यह फैसला छात्रों की सुरक्षा, दूरी, और पढ़ाई में व्यवधान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

बाल वाटिका बनेगी खाली बिल्डिंग में

शिक्षा मंत्री ने कहा कि मर्जर के कारण जो स्कूल भवन खाली हो गए हैं, वहां पर महिला और बाल कल्याण विभाग के सहयोग से बाल वाटिका चलाई जाएगी, जहां 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए विशेष शिक्षा कार्यक्रम संचालित होंगे। इसके लिए सरकार ने करीब 18 हजार एजुकेटर्स की भर्ती GEM पोर्टल से की है, और उनके लिए विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार किया गया है

मर्जर को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती

बता दें कि 16 जून 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य भर के स्कूलों को मर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के तहत 100 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को नजदीकी उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूल में मर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

इस निर्णय के खिलाफ सीतापुर की छात्रा कृष्णा कुमारी समेत 51 छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें RTE कानून और बच्चों की सुरक्षा का हवाला दिया गया। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिसे बाद में डबल बेंच में चुनौती दी गई। लखनऊ हाईकोर्ट ने हाल ही में सीतापुर के 210 में से 14 स्कूलों के मर्जर पर रोक लगाते हुए पुरानी स्थिति बहाल करने का आदेश दिया है।

मुख्यमंत्री मॉडल स्कूलों की स्थापना

सरकार अब हर जिले में एक-एक मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय (कक्षा 1 से 8 तक) और मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट स्कूल (कक्षा 1 से 12 तक) की स्थापना भी कर रही है। अभ्युदय विद्यालयों में 450 छात्रों के लिए और मॉडल स्कूलों में 1500 छात्रों के लिए स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, एडवांस लैब, खेल मैदान, ओपन जिम, वाई-फाई, पीने का पानी और मिड-डे मील जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिक्षक संघों ने जताई थी आपत्ति

उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ और प्राइमरी शिक्षक संघ ने स्कूल मर्जर पर चिंता जताई थी। महिला शिक्षक संघ की अध्यक्ष सुलोचना मौर्य ने कहा था कि बच्चों की दूरी और सुरक्षा को लेकर यह फैसला गलत है। वहीं शिक्षक संघ के अध्यक्ष योगेश त्यागी ने सरकार पर RTE और बाल संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाया था।

वर्षों से स्थायी हेडमास्टर नहीं

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 70% से अधिक स्कूलों में कार्यवाहक प्रधानाध्यापक हैं। सालों से प्रमोशन नहीं होने की वजह से हेडमास्टर की स्थायी नियुक्तियां लंबित हैं। कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को कोई अतिरिक्त वेतन या भत्ता भी नहीं दिया जाता।

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