- SC ने पूछा- “क्या कलेक्टर बन गए हैं वक्फ संपत्तियों के मालिक?”
- धर्म vs कानून: वक्फ एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता क्यों बढ़ा रही है सरकार की मुश्किलें?
- “अगर मंदिरों पर लागू हो ये कानून तो…” – कोर्ट ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के खिलाफ दायर 70 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई हुई। करीब दो घंटे तक चली बहस के बाद गुरुवार को भी इस मामले पर सुनवाई जारी रहेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें रखीं, जबकि केंद्र सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा।
‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने ‘वक्फ बाय यूजर’ प्रावधान पर गंभीर चिंता जताई। अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि देशभर की 8 लाख वक्फ संपत्तियों में से आधी (4 लाख से अधिक) ‘वक्फ बाय यूजर’ के तहत रजिस्टर्ड हैं। इस प्रावधान के अनुसार, कोई संपत्ति लंबे समय तक इस्लामिक धार्मिक उद्देश्यों से इस्तेमाल होने पर वक्फ मानी जाती है, भले ही उसका कोई लिखित दस्तावेज न हो। कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि कोई अपनी जमीन पर धार्मिक या सामाजिक कार्य करना चाहता है, तो सरकार उसे रजिस्ट्रेशन के लिए क्यों बाध्य करेगी?
कलेक्टर द्वारा वक्फ संपत्ति का दर्जा रद्द करने पर आपत्ति
नए कानून के तहत, यदि जिला कलेक्टर किसी संपत्ति को सरकारी भूमि घोषित कर देता है, तो उसका वक्फ दर्जा समाप्त हो जाएगा, जब तक कि अदालत अंतिम फैसला न दे। कोर्ट ने इस पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि कलेक्टर की जांच के दौरान वक्फ का दर्जा बरकरार रहना चाहिए। सुझाव दिया गया कि कलेक्टर जांच कर सकता है, लेकिन उसका निर्णय अंतिम नहीं होगा।
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल
नए कानून में वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ काउंसिल में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान है। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या सरकार हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति करेगी?” कोर्ट ने सुझाव दिया कि बोर्ड के स्थायी सदस्य मुस्लिम होने चाहिए, हालांकि एक्स-ऑफिशियो सदस्य गैर-मुस्लिम हो सकते हैं।
निष्कर्ष: सरकार के लिए बढ़ी मुश्किलें
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने केंद्र सरकार की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। तीन प्रमुख मुद्दों—’वक्फ बाय यूजर’, कलेक्टर की शक्तियाँ और गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति—पर कोर्ट का रुख स्पष्ट है। आगामी सुनवाई में सरकार को इन चिंताओं का समाधान पेश करना होगा।








