IBC के सेक्शन 32A में ऐसा क्या है, जिससे JSW स्टील को नहीं मिला संरक्षण?

  • IBC की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, नियमों के उल्लंघन की नहीं मिलेगी छूट
  • ED की आपत्तियों को कोर्ट ने माना जायज़, JSW स्टील को नहीं मिला कानूनी संरक्षण
  • भूषण पावर एंड स्टील को मिलेगा नया खरीदार या होगा लिक्विडेशन

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भूषण पावर एंड स्टील (BPSL) के मामले में JSW स्टील के रिजोल्यूशन प्लान को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) को यह प्लान स्वीकार नहीं करना चाहिए था। साथ ही, अदालत ने कंपनी के लिक्विडेशन का निर्देश दिया है।

कोर्ट का फैसला

जस्टिस बेल एम. त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 32A का हवाला देते हुए कहा कि JSW स्टील को इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए था। कोर्ट ने कहा कि IBC के तहत टेकओवर सिर्फ इक्विटी के जरिए होना चाहिए था, न कि डेट के जरिए।

ED की दलील

एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने कोर्ट में कहा था कि JSW स्टील IBC के तहत एक “रिलेटेड पार्टी” है, इसलिए उसे यह डील नहीं करनी चाहिए थी। ED ने भूषण पावर एंड स्टील के खिलाफ बैंक फ्रॉड के मामले में केस दर्ज किया है और पिछले साल 4,025 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी।

JSW का प्लान और नुकसान

JSW स्टील ने भूषण पावर एंड स्टील के लिए 19,700 करोड़ रुपए का रिजोल्यूशन प्लान पेश किया था, लेकिन लेंडर्स को इस डील में करीब 60% का नुकसान हुआ। कल्याणी ट्रांसको प्राइवेट लिमिटेड ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद यह फैसला आया।

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