- लखनऊ विश्वविद्यालय में देशद्रोह के आरोपों पर घमासान
- डॉ. सौरव बनर्जी के खिलाफ छात्रों ने किया विरोध प्रदर्शन
- सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद, विश्वविद्यालय ने नोटिस जारी किया
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) के दो असिस्टेंट प्रोफेसर्स—डॉ. सौरव बनर्जी और डॉ. माद्री काकोटी—पर देशविरोधी गतिविधियों और पाकिस्तान-समर्थक विचार रखने के गंभीर आरोप लगे हैं। छात्र संगठनों ने उनके खिलाफ कैंपस में जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 48 घंटे के भीतर दोनों को शो-कॉज नोटिस जारी किया। मामला तब गर्माया जब डॉ. काकोटी का पहलगाम आतंकी हमले पर विवादित पोस्ट पाकिस्तानी हैंडल्स पर वायरल हुआ, जबकि डॉ. बनर्जी के सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आईं।
छात्रों का आक्रोश: “क्लासरूम नहीं, कठघरे में जगह”
रिसर्च स्टूडेंट प्रत्यूष पांडे ने कहा, “ये प्रोफेसर युवाओं का ब्रेनवॉश कर देशद्रोह फैला रहे हैं। इन्होंने पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान या आतंकवादियों की नहीं, बल्कि सरकार की आलोचना की। इनका ट्विटर अकाउंट डिलीट करना ही गुनाह साबित करता है।”
ABVP से जुड़े छात्रों ने मांग की कि इन पर देशद्रोह का केस दर्ज कर तत्काल निलंबित किया जाए।
विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई
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डॉ. बनर्जी को PM मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ “अभद्र भाषा” इस्तेमाल करने के आरोप में नोटिस।
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डॉ. काकोटी का पोस्ट पाकिस्तान में वायरल होने के बाद FIR दर्ज, जिसमें उन पर “धर्म के आधार पर हिंसा भड़काने” का आरोप।
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LU प्रशासन ने दोनों के प्रोफाइल आधिकारिक वेबसाइट से हटा दिए।
प्रोफेसर्स का बचाव या मौन?
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डॉ. बनर्जी ने मीडिया से बात करने से इनकार करते हुए कहा, “प्रशासन को जवाब दूंगा।” उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट को डिलीट और फेसबुक को प्राइवेट कर दिया।
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डॉ. काकोटी ने X (ट्विटर) पर लिखा, “मैं देशभक्त हूं और हमेशा रहूंगी,” लेकिन छात्रों ने इसे “छल” बताया।
शिक्षक संघ और फैकल्टी का रुख
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LU टीचर्स एसोसिएशन ने अभी तक कोई स्टैंड नहीं लिया, जबकि IPPR के प्रो. दुर्गेश ने कहा, “राष्ट्रीय मुद्दों पर संवेदनशीलता जरूरी है।”
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कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रोफेसर्स “विदेशी फंडिंग” से जुड़े हैं, जिसकी जांच होनी चाहिए।
पुलिस कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, डॉ. बनर्जी के खिलाफ जानकीपुरम थाने में देशद्रोह की धारा में FIR दर्ज की जा सकती है। पहले ही डॉ. काकोटी पर IPC की धारा 124A (देशद्रोह) समेत 7 धाराएं लग चुकी हैं।
छात्रों की चेतावनी: “ये ट्रेंड नहीं चलने देंगे”
बीए छात्र आदित्य सिंह ने कहा, “अगर ऐसे प्रोफेसर्स को रोका नहीं गया, तो यह फैशन बन जाएगा।” वहीं, अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा, “हम सरकार से असहमत हो सकते हैं, लेकिन देश के खिलाफ बयानबाजी बर्दाश्त नहीं।”
क्या है पूरा मामला?
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डॉ. माद्री काकोटी: पहलगाम हमले के बाद उनके पोस्ट (“धर्म पूछकर बुलडोजर चलाना आतंकवाद है”) को पाकिस्तानी हैंडल्स ने शेयर किया।
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डॉ. सौरव बनर्जी: उनके सोशल मीडिया पर PM मोदी और BJP के खिलाफ टिप्पणियां, जिनमें आतंकवादियों की निंदा न करने पर सवाल उठे।
अब क्या?
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विश्वविद्यालय प्रशासन 5 दिन में दोनों प्रोफेसर्स के जवाब का इंतजार कर रहा है।
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पुलिस आरोपों की जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।
निष्कर्ष: यह मामला अकादमिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच की लकीर पर खड़ा है, जिसमें छात्रों और प्रशासन की नजरें अब कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।








