- बिजली गुल होने से NEET UG परीक्षा कैसे प्रभावित हुई
- इंदौर के 11 परीक्षा केंद्रों में क्यों बजी नहीं बिजली
- हाईकोर्ट ने NEET UG रिजल्ट जारी करने पर क्यों लगाई रोक
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने NEET UG 2024 के अंतरिम परिणाम पर रोक लगा दी है। यह फैसला 4 मई को हुई परीक्षा के दौरान बिजली गुल होने से प्रभावित हजारों छात्रों की याचिका पर आया है। कोर्ट ने कहा कि अंतिम फैसला होने तक रिजल्ट जारी नहीं किया जाएगा।
क्या हुआ था परीक्षा के दौरान?
4 मई को मध्य प्रदेश के 30 शहरों में NEET UG की परीक्षा हुई, जिसमें करीब 2.5 लाख छात्र शामिल थे। इंदौर में 49 केंद्र बनाए गए थे, जहां लगभग 27,000 छात्रों ने परीक्षा दी। लेकिन अचानक तेज बारिश और 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चली आंधी के कारण शहर की बिजली व्यवस्था ठप हो गई। इससे 11 परीक्षा केंद्रों में अंधेरा छा गया और छात्रों को मोमबत्ती और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पेपर देना पड़ा।
छात्रों की शिकायत, कोर्ट ने दिया नोटिस
प्रभावित छात्रों ने बताया कि अंधेरे के कारण वे प्रश्नपत्र ठीक से नहीं पढ़ पाए, जिससे उनका पेपर खराब हो गया। कई छात्र रोते हुए परीक्षा केंद्र से बाहर निकले। इस मामले पर हाईकोर्ट ने NEET आयोजक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA), बिजली विभाग और परीक्षा केंद्र प्रबंधन को नोटिस जारी किए हैं। सभी पक्षों को 30 जून तक जवाब दाखिल करना होगा।
पहले भी हुई है ऐसी घटना
जानकारों के मुताबिक, 2016 में ओडिशा में चक्रवात के दौरान प्रभावित छात्रों के लिए NTA ने दोबारा परीक्षा आयोजित की थी। इसी तरह, 2022 में होशंगाबाद सहित कुछ अन्य केंद्रों पर भी ऐसी समस्या आई थी। छात्रों का कहना है कि NTA को ऐसी स्थितियों के लिए बैकअप प्लान बनाना चाहिए था।
अब क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब NTA को प्रभावित छात्रों के लिए समाधान प्रस्तावित करना होगा। छात्रों की मांग है कि उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाए या फिर उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए मेरिट लिस्ट तैयार की जाए।
NEET UG के बिना मेडिकल एडमिशन असंभव
NEET UG के अलावा मेडिकल, नर्सिंग, आयुर्वेद, होम्योपैथी और वेटरनरी कोर्सेज में दाखिले का कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में अगर रिजल्ट में देरी होती है, तो हजारों छात्रों का एक साल बर्बाद हो सकता है।
उज्जैन में भी हुआ था हंगामा
इसी तरह, उज्जैन के शासकीय माधव महाविद्यालय में भी बिजली गुल होने के बाद छात्रों और अभिभावकों ने हंगामा किया था। उनका आरोप था कि कुछ कमरों को अतिरिक्त समय दिया गया, जबकि अन्य को नहीं मिला।







