
- ऐप आधारित दर्शन व्यवस्था पर विवाद
- कांग्रेस और सपा ने किया विरोध
- मंदिर प्रशासन पर “बाजारीकरण” के आरोप
वाराणसी। प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया दौरे के बाद Kashi Vishwanath Temple में लागू की जा रही नई ऐप आधारित प्रणाली को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आम श्रद्धालुओं के साथ अब राजनीतिक दल भी खुलकर विरोध में उतर आए हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस व्यवस्था को आस्था के खिलाफ बताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं बढ़ते विरोध को देखते हुए मंदिर परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
विपक्ष के आरोप तेज
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि यह व्यवस्था “आस्था पर प्रहार” है। उनका आरोप है कि मंदिर को “प्रयोगशाला” बनाकर सनातन परंपराओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन पर मंदिर को “व्यापारिक केंद्र” में बदलने की कोशिश का भी आरोप लगाया।
वहीं समाजवादी पार्टी ने भी इस फैसले को श्रद्धालुओं की स्वतंत्रता पर अंकुश बताते हुए कहा कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।
प्रशासन पर उठे सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि ऐप आधारित व्यवस्था से आम भक्तों को बाबा के दर्शन में बाधा उत्पन्न होगी और परंपरागत व्यवस्था खत्म हो जाएगी। प्रशासन पर “मनमानी” और “डिजिटल नियंत्रण” थोपने के आरोप लगाए गए हैं।
सुरक्षा बढ़ाई गई
शुक्रवार को विरोध के मद्देनज़र मंदिर गेट पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से निपटा जा सके।









