क्यों राणा का नाम मुंबई हमलों में आया और उसकी भूमिका को कैसे समझें?

  • NIA की कस्टडी में राणा: पूछताछ और रहस्यमय बयान
  • ‘ऑपरेशन राणा’: गुप्त मिशन के तहत अमेरिका से भारत लाया गया आतंकी
  • तहव्वुर राणा की अमेरिका में गिरफ्तारी और आरोप

नई दिल्ली।  2008 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी आज समाप्त हो रही है। NIA ने राणा को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया है और अब वह कोर्ट से उसकी कस्टडी बढ़ाने की मांग कर सकती है। तहव्वुर राणा को 10 अप्रैल को एक विशेष विमान से अमेरिका से भारत लाया गया था, और उसका प्रत्यर्पण ‘ऑपरेशन राणा’ के तहत एक गुप्त मिशन के रूप में किया गया। राणा को स्पेशल NIA जज चंद्रजीत सिंह की बेंच में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 18 दिन की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया था।

अमेरिका से प्रत्यर्पण और NIA की कस्टडी

तहव्वुर राणा को 10 अप्रैल को एक स्पेशल प्लेन के जरिए अमेरिका से भारत लाया गया था। यह ऑपरेशन ‘ऑपरेशन राणा’ नामक एक टॉप-सीक्रेट मिशन के तहत किया गया था। कोर्ट ने उन्हें 18 दिनों की NIA कस्टडी में भेज दिया था, जो आज समाप्त हो रही है। पिछले 18 दिनों से मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच और NIA के अधिकारी राणा से पूछताछ कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, राणा ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया और टालमटोल की रणनीति अपनाई।

कोर्ट ने परिवार से बातचीत की याचिका खारिज की

24 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट ने राणा की याचिका, जिसमें उन्होंने अपने परिवार से बात करने की अनुमति मांगी थी, को खारिज कर दिया था। NIA ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि राणा संवेदनशील जानकारी लीक कर सकता है।

कौन है तहव्वुर राणा?

  • 64 वर्षीय तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है।

  • वह पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर रह चुका है और बाद में कनाडा चला गया।

  • अमेरिका में उसने एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म खोली और आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गया।

  • वह 26/11 हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली का करीबी सहयोगी था और लश्कर-ए-तैयबा को समर्थन देने के लिए जाना जाता है।

  • 2009 में अमेरिकी FBI ने उसे गिरफ्तार किया था और 14 साल बाद भारत प्रत्यर्पित किया गया।

26/11 हमले की भयावहता

26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने मुंबई में सीरियल हमले किए, जिसमें 166 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए। यह भारत के इतिहास का सबसे भीषण आतंकी हमला था। अब NIA और भारतीय एजेंसियां राणा से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसके अलावा भी कोई बड़े साजिशकर्ता इस हमले में शामिल थे।

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