- इस्तांबुल में आज होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता का क्या होगा असर?
- यूक्रेन-रूस सीजफायर, क्या इस बार होगी स्थायी शांति?
- रूस का प्रतिनिधिमंडल कब करेगा वार्ता में हिस्सा?
अंकारा। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की बुधवार को तुर्की की राजधानी इस्तांबुल पहुंचे, जहां वह रूस के साथ युद्धविराम पर चर्चा करेंगे। हालांकि, रूस ने अभी तक अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेजा है, जिससे वार्ता की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं।
ज़ेलेंस्की का रुख: “हर फॉर्मेट पर चर्चा के लिए तैयार”
एक वीडियो संदेश में ज़ेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन किसी भी प्रारूप में शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन हमारा अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि रूस किसे वार्ता के लिए भेजता है।” उन्होंने पिछले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधी बातचीत का निमंत्रण दिया था, लेकिन पुतिन ने इनकार कर दिया। दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात 2019 में हुई थी।
सीजफायर को लेकर आरोप-प्रत्यारोप
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29 अप्रैल को पुतिन ने 8-11 मई तक “एकतरफा युद्धविराम” की घोषणा की थी, लेकिन यूक्रेन ने इसे “दिखावा” बताते हुए खारिज कर दिया।
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रूसी रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन पर 14,000 बार सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाया।
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यूक्रेन ने दावा किया कि रूस ने 11 मई की रात 108 ड्रोन हमले किए, जिनमें से 60 को मार गिराया गया।
यूरोपीय देशों का समर्थन
10 मई को फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और पोलैंड के नेताओं ने कीव में ज़ेलेंस्की से मुलाकात कर यूक्रेन को सैन्य सहायता जारी रखने का वादा किया। उन्होंने रूस को चेतावनी दी कि अगर वह युद्धविराम नहीं मानता, तो पश्चिम यूक्रेन को और हथियार देगा।
आगे की रणनीति
तुर्की (जो नाटो सदस्य होते हुए भी रूस के साथ संबंध बनाए हुए है) इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, पुतिन के न बैठने से शांति प्रक्रिया धीमी दिख रही है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस यूक्रेन पर “सीजफायर तोड़ने का दोष” मढ़कर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना चाहता है।








