क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई से निवेशकों को मिलेगा न्याय?

  • क्या है अंसल ग्रुप के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई
  • क्यों की गईं लखनऊ, दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में एक साथ छापेमारी
  • कैसे यूपी रेरा की रिपोर्ट ने 600 करोड़ रुपए के गबन का खुलासा किया

लखनऊ।  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अंसल प्रॉपर्टीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (APIL) के लखनऊ, दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद स्थित दफ्तरों में एक साथ छापेमारी की। एजेंसी यूपी रेरा की रिपोर्ट के आधार पर 600 करोड़ रुपए के गबन और निवेशकों से धोखाधड़ी के आरोपों की जांच कर रही है।

यूपी रेरा की जांच में यह सामने आया है कि अंसल API ने विभिन्न हाउसिंग प्रोजेक्ट्स से प्राप्त फंड का दुरुपयोग करते हुए 600 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि अन्य स्थानों पर ट्रांसफर की। कंपनी के प्रमोटर्स प्रणव अंसल और सुशील अंसल पर सरकारी भूमि की अवैध बिक्री, निवेशकों से धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप हैं।

एफआईआर और दिवालिया प्रक्रिया में तेजी
लखनऊ पुलिस ने जानकारी दी कि अंसल ग्रुप के खिलाफ अब तक 70 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके अलावा, कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में शुरू की जा चुकी है।

निवेशकों का प्रदर्शन और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
लखनऊ की सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना से जुड़े सैकड़ों निवेशकों ने अंसल API के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर न्याय की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कई साल पहले भुगतान किया था, लेकिन अब तक कब्जा नहीं मिला।

इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रभावित जिलों में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही।

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