भूमि विवाद में उपजिलाधिकारी की भूमिका कितनी अहम होती है?

  • वर्षों पुराने जमीनी झगड़े का हुआ निष्पक्ष समाधान
  • पुलिस बल की निगरानी में सीमांकन कर वादियों को मिला इंसाफ
  • अधिवक्ता की सटीक दलीलों से मिली जीत, प्रशासन ने निभाई जिम्मेदारी

आलापुर-अम्बेडकरनगर।  आलापुर तहसील के मौजा खरूवइयां में दशकों पुराने भूमि विवाद का निराकरण हुआ। उपजिलाधिकारी के आदेश पर राजस्व टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में पत्थर नसब (सीमांकन) कार्यवाही करके विवादित भूमि की वास्तविक सीमाएँ चिन्हित कीं।

विवाद की पृष्ठभूमि

ग्रामीण शमशेर यादव, सुरेंद्र यादव व रविंद्र यादव ने आरोप लगाया था कि कौसिल्या देवी (पति जमुना प्रसाद) समेत 15 लोगों ने उनकी 0.884 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण किया है। तहसील प्रशासन ने नोटिस जारी कर पैमाइश के लिए विपक्षियों को तलब किया, लेकिन उनकी आपत्तियों के चलते कार्यवाही रुक गई।

न्यायिक प्रक्रिया

वादियों के अधिवक्ता शशिकांत तिवारी ने उपजिलाधिकारी के समक्ष मामले की जोरदार पैरवी की। तथ्यों की जाँच के बाद गाटा संख्या 368 (कुल 0.9070 हेक्टेयर) में से 0.884 हेक्टेयर भूमि वादियों को आवंटित करते हुए 24 मार्च 2025 को पत्थर नसब का आदेश पारित किया गया।

कार्यवाही का निष्कर्ष

नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक व पुलिस की टीम ने शजरा मानचित्र के अनुसार सीमाएँ अंकित कीं और विवादित भूमि पर पत्थर गाड़कर मामले को स्थायी समाधान दिया। इससे दोनों पक्षों को न्याय मिलने की उम्मीद है।

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