
- 29 मई को प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार
- जिला प्रशासन की वैकल्पिक तैयारी
- आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
अम्बेडकरनगर। मध्यांचल पावर कारपोरेशन के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन व विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति द्वारा घोषित आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 29 मई को जनपद सहित प्रदेशभर में अवर अभियंता, एसडीओ, लिपिक और लाइनमैन सहित समस्त तकनीकी व गैर तकनीकी विद्युत कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे। इस बाबत विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन और पावर कारपोरेशन ने वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है।
विद्युत कर्मियों के कार्य बहिष्कार के मद्देनज़र जिला प्रशासन ने विद्युत आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए एनटीपीसी टांडा, आईटीआई व पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्रशिक्षित छात्रों को 41 विद्युत उपकेंद्रों पर तैनात करने की योजना बनाई है। तकनीकी कोर्स के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत इलेक्ट्रिकल ट्रेड के छात्रों को जिम्मेदारी दी जाएगी। वहीं एनटीपीसी टांडा के विद्युत ट्रेड से जुड़े जूनियर इंजीनियरों की सेवाएं भी ली जाएंगी।
प्रशासन के अनुसार, जिलेभर में बिजली आपूर्ति को नियमित बनाए रखने हेतु एक हजार से अधिक तकनीकी युवाओं की एक रैपिड रिस्पांस टीम तैयार की गई है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर अलग-अलग उपकेंद्रों पर तत्काल भेजा जाएगा। इसके साथ ही निजी सेवा प्रदाता एजेंसियों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
कार्य बहिष्कार की घोषणा करते हुए जिलाध्यक्ष अनिल कुमार बाल्मीकि व एसडीओ सौरभ कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वांचल व दक्षिणांचल पावर कारपोरेशन के निजीकरण प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही सेवा सुरक्षा की गारंटी दी जाए। आंदोलन के पीछे कर्मचारियों की यह आशंका है कि निजीकरण के बाद नौकरी की स्थिरता, वेतनमान और सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।








