
- अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ और कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन
- भंते यश कुमार और बौद्ध चिंतक रामबली त्रिशरण की प्रमुख उपस्थिति
- बुद्ध दर्शन में सामाजिक समानता, करुणा और सम्यक मार्ग पर बल
अम्बेडकरनगर। बीएनकेबी पी.जी. कॉलेज, अकबरपुर के प्रांगण में सोमवार को ‘बुद्ध-पथ-प्रदीप’ शीर्षक से सात दिवसीय कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह कार्यशाला संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अधीन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ एवं महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है, जो 27 मई से 7 जून 2025 तक संचालित होगी।
कार्यक्रम का उद्घाटन भंते यश कुमार जी के मुख्य आतिथ्य और रामअवध जनता इंटर कॉलेज के प्रवक्ता एवं बौद्ध चिंतक रामबली त्रिशरण के मुख्य वक्ता रूप में उपस्थिति के साथ हुआ। अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शुचिता पांडेय ने की। कार्यशाला के संयोजक डॉ. शशांक मिश्र हैं, जबकि सह-संयोजन में डॉ. विवेक कुमार तिवारी, दिनेश कुमार तथा डॉ. बृजेश कुमार रजक का योगदान है।
प्राचार्य प्रो. शुचिता पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि बुद्ध का दर्शन सामाजिक समानता, नैतिकता और अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित है, जो आज भी समाज के हर वर्ग के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि बुद्ध ने जाति, वर्ग और लिंग के भेदभाव को अस्वीकार करते हुए करुणा, शिक्षा और समभाव का संदेश दिया। बौद्ध मठों ने केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि शैक्षिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी समाज को दिशा दी।
भंते यश कुमार जी ने चार आर्य सत्यों की व्याख्या करते हुए कहा कि बुद्ध धर्म का आधार जीवन के दुख और उससे मुक्ति की प्रक्रिया है। तृष्णा और अज्ञानता दुख का मूल कारण है, जिससे मुक्ति अष्टांगिक मार्ग से संभव है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग मानव को नैतिक आचरण, ध्यान और प्रज्ञा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।








