- 1652 से हो रहा है रिसाव – औरंगजेब ने शाहजहां को पहली बार भेजी थी शिकायत
- ब्रिटिश काल में भी हुई मरम्मत – 1872 और फिर 1941 में ताज के गुंबद पर हुआ था बड़ा काम
- ASI ने गठित की समिति – जांच के बाद ही श्रमिकों को काम पर लगाया जाएगा
आगरा । विश्व प्रसिद्ध धरोहर ताजमहल एक बार फिर बारिश में टपकने को मजबूर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की थर्मल स्कैनिंग में खुलासा हुआ है कि ताजमहल के मुख्य गुंबद में 73 मीटर ऊंचाई पर पानी का रिसाव हो रहा है। अब ASI 15 दिनों में पाड़ (बांस की संरचना) पर चढ़कर दरारों और क्षतिग्रस्त हिस्सों की फिजिकल जांच करेगा। इसके बाद छह महीने तक मरम्मत का काम चलेगा।
तीन प्रमुख कारणों से हो रहा है रिसाव
ASI की लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) तकनीक से की गई जांच में तीन गंभीर तकनीकी खामियां सामने आईं:
गुंबद पर लगे पत्थरों की टीप का मसाला खराब हो गया है।
गुंबद की छत का दरवाजा और फर्श टूट चुके हैं।
कलश को सहारा देने वाली लोहे की रॉड में जंग लग गई है और मसाला फूल गया है।
अब होगी फिजिकल जांच, 15 दिन में पूरी रिपोर्ट
ASI के वरिष्ठ संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी ने बताया कि पहले ड्रोन और थर्मल तकनीक से जांच की गई, अब तकनीशियन और कर्मचारी पाड़ पर चढ़कर दरारें, टूटी फर्श और पत्थरों का निरीक्षण करेंगे। जांच के बाद क्रॉस वैरिफिकेशन के आधार पर मरम्मत शुरू की जाएगी।
गुंबद की मरम्मत में लगेंगे 6 महीने, खर्च होंगे ₹76 लाख
मरम्मत कार्य के लिए ASI ने 76 लाख रुपए का बजट तय किया है। इसमें से 19.82 लाख रुपए मटेरियल पर और 56.93 लाख रुपए मजदूरी पर खर्च होंगे। चूंकि कलश 73 मीटर यानी करीब 240 फीट की ऊंचाई पर है, इसलिए मरम्मत चुनौतीपूर्ण होगी।








