वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में चंदन के कीमती पेड़ों की चोरी और अवैध कटाई के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाते हुए कई तीखे सवाल दागे।
एनजीटी की प्रधान पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और डॉ. ए. सेंथिल वेल शामिल हैं, ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
NGT का सवाल – “इतनी सुरक्षा में लकड़ी बाहर कैसे गई?”
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिकाकर्ता अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने मामला रखा।
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा –
“लकड़ी कोई गठरी नहीं होती, इतनी सुरक्षा के बीच वह बाहर कैसे निकल गई?”
बीएचयू के वकील का “पौधे” वाला तर्क बना मजाक
बीएचयू की तरफ से जब यह दलील दी गई कि कटे हुए चंदन “पौधे” थे, तो न्यायमूर्ति श्रीवास्तव और अग्रवाल ने इसे बचकाना तर्क बताते हुए फटकार लगाई।
उन्होंने कहा –
“एफआईआर में यदि ‘चंदन की लकड़ी’ और ‘कीमती वृक्ष’ लिखा है, तो पौधे की बात हास्यास्पद है।”
12 अन्य पेड़ भी कटे, बिना वैज्ञानिक आकलन
एनजीटी ने यह भी पूछा कि जब पहली एफआईआर में 4 चंदन के पेड़ों का ज़िक्र है, तो दूसरी एफआईआर में सिर्फ ‘कीमती वृक्ष’ क्यों कहा गया?
12 अन्य पेड़, जिनमें आम, महुआ, कटहल, गोल्ड मोहर जैसे वृक्ष शामिल हैं, उन्हें भी बिना वैज्ञानिक परीक्षण के क्यों काटा गया?
2018 से 2023 तक 8 चंदन पेड़ गायब
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 2018 से 2023 के बीच 8 चंदन पेड़ चोरी हुए।
BHU ने शोध छात्रा के घायल होने का हवाला देकर पेड़ काटे जाने को उचित ठहराया, जिसे एनजीटी ने ‘कागजी बचाव’ करार दिया।
कोर्ट ने कहा – “सब मिले हुए हैं”
जिलाधिकारी और वन विभाग के प्रतिनिधि की गैरहाजिरी पर भी एनजीटी ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,
“ऐसा प्रतीत होता है कि सब मिले हुए हैं।”
2 हफ्ते में जवाब और संभावित जुर्माना
BHU के वकील ने दो सप्ताह का समय मांगा है।
न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कटाक्ष किया –
“अगर हॉस्टल के बाहर पेड़ हैं तो क्या सबको खतरा बताकर काट देंगे? दिल्ली में आंधी आती है तो क्या सब पेड़ काट देते हैं?”








