
- एनबीएफसी शिक्षा ऋण वृद्धि दर इस साल घटकर 25% रहने की संभावना
- अमेरिका-कनाडा में वीजा चुनौतियों से विदेशी लोन की मांग घटी
- 2023-24 में 77%, 2024-25 में 48% और 2025-26 में अनुमानित 25% वृद्धि
नई दिल्ली। गैर-सरकारी वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शिक्षा ऋण कारोबार की तेज़ रफ्तार पर इस वित्त वर्ष ब्रेक लगने की संभावना है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में शिक्षा ऋण पोर्टफोलियो की वृद्धि दर घटकर लगभग 25% रहने की उम्मीद है, जो बीते वर्षों की तुलना में करीब आधी है।
एजुकेशन लोन पोर्टफोलियो में बड़ी गिरावट की आशंका
बीते वित्त वर्ष 2024-25 में एनबीएफसी का शिक्षा ऋण पोर्टफोलियो (एयूएम) ₹64,000 करोड़ तक पहुंचा था, जिसमें 48% की जबरदस्त वृद्धि देखी गई। उससे पहले वर्ष 2023-24 में यह बढ़त 77% थी। लेकिन इस साल यह आंकड़ा सिर्फ ₹80,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है।
वीजा नीति बनी रुकावट, अमेरिका-कनाडा से कम हुआ एजुकेशन लोन डिमांड
क्रिसिल की निदेशक मालविका भोटिका ने बताया कि अमेरिका में वीजा अपॉइंटमेंट्स की कमी, OPT (वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण) जैसे नियमों में बदलाव और नीति अस्थिरता के कारण वहां पढ़ने वाले छात्रों के लिए लोन की मांग घटी है। इससे अमेरिकी क्षेत्र में लोन वितरण 30% तक गिरा है।
वहीं, कनाडा में भी कड़े वीजा नियमों ने लोन मांग को प्रभावित किया, जिससे वित्त वर्ष 2025 में समग्र शिक्षा ऋण वितरण की वृद्धि सिर्फ 8% रह गई, जबकि पिछले साल यह 50% थी।
ब्रिटेन-जर्मनी जैसे विकल्पों में बढ़ी रुचि
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और कनाडा में आई गिरावट के बीच छात्रों ने ब्रिटेन, जर्मनी, आयरलैंड जैसे वैकल्पिक गंतव्यों की ओर रुख किया है। बीते वर्ष इन देशों से जुड़े कोर्सों के भुगतान दोगुने हो गए हैं। अब इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी कुल एजुकेशन लोन में 50% तक पहुंच चुकी है, जो पिछले वर्ष 25% थी।








