
- हसीना, पूर्व गृह मंत्री और IGP पर ITC में आरोप तय
- 1400 प्रदर्शनकारियों की हत्या का जिम्मेदार बताया गया
- हसीना पर देशद्रोह, अपहरण और मानवता के खिलाफ अपराध
ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल (ITC) ने गुरुवार को मानवता के खिलाफ अपराध के गंभीर आरोप तय कर दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने हसीना के साथ पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिदेशक (IGP) चौधरी अब्दुल्लाह अल मामून को सह-आरोपी बनाया है।
मामले की सुनवाई 3 अगस्त से शुरू होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी मामून ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और सरकारी गवाह बनने की याचिका दी है। वह फिलहाल जेल में है, जबकि हसीना और कमाल देश से बाहर हैं, इसलिए मुकदमा अनुपस्थिति में चलेगा।
हसीना पर अब तक पांच आपराधिक केस
ITC में शेख हसीना के खिलाफ दर्ज पांच मामलों में 1400 लोगों की हत्या, भीड़ को उकसाना, और सरकारी शक्तियों के दुरुपयोग जैसे आरोप हैं। अगस्त 2024 में सरकार के तख्तापलट के बाद से हसीना भारत में रह रही हैं। उनके खिलाफ जुलाई में अदालत की अवमानना में 6 महीने की जेल की सजा भी सुनाई जा चुकी है।
ढाका हिंसा: 1400 नागरिकों की मौत का आरोप
5 जून, 2024 को बांग्लादेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में 30% कोटा लागू किया था, जो स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों के लिए था। इस फैसले के विरोध में विश्वविद्यालयों में छात्रों ने जबर्दस्त प्रदर्शन शुरू किया।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़की और लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई, जिनमें से अधिकांश छात्र थे। हसीना पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गोली मारने के आदेश दिए। इसके दो महीने बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दिया और भारत चली गईं।
फोन ऑडियो बना बड़ा सबूत
हसीना और स्थानीय नेता शकील बुलबुल की एक फोन बातचीत लीक हुई थी, जिसमें वह कथित रूप से कह रही थीं – “मेरे खिलाफ 227 केस हैं, तो मुझे 227 लोगों को मारने का लाइसेंस मिल गया है।” ITC ने इसी ऑडियो को अदालत की अवमानना का आधार मानते हुए उन्हें 6 महीने की सजा दी थी।
225 से अधिक मामले दर्ज
तख्तापलट के बाद सत्ता में आई यूनुस सरकार ने शेख हसीना पर हत्या, देशद्रोह और अपहरण जैसे 225 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए हैं। सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है और गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए हैं।








