- विषय: “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य”।
- प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय ने नीति को कौशल-उन्मुख और लचीला बताया।
- वित्तीय निवेश, बुनियादी ढाँचे और जीडीपी खर्च में वृद्धि की आवश्यकता पर जोर।
अकबरपुर (अंबेडकरनगर)। बी.एन.के.बी. पी.जी. कॉलेज, अकबरपुर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के पाँच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के नेतृत्व में किया गया। अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय ने की और संचालन ले. (डॉ.) विवेक कुमार तिवारी ने किया। संयोजन डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव (बीएड विभाग) और डॉ. शशांक मिश्र (हिंदी विभाग) ने किया।
नई शिक्षा नीति: आधुनिक और समावेशी दृष्टिकोण
प्राचार्य प्रो. शुचिता पाण्डेय ने कहा कि एनईपी 2020 भारतीय शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रासंगिक और कौशल-उन्मुख बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। विषय चयन में लचीलापन, मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा, और कक्षा 6 से व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत इसके प्रमुख बिंदु हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शोध फाउंडेशन (NRF) अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
लक्ष्य और वित्तीय चुनौतियाँ
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम छात्रों को पढ़ाई में लचीलापन देगा। 2035 तक सकल नामांकन अनुपात 50% करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके लिए भारी वित्तीय निवेश और बुनियादी ढाँचे की जरूरत है। शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च लक्ष्य अभी 3.9% के आसपास ही है, जो चिंताजनक है।
भाषा और डिजिटल डिवाइड
बीएड विभाग के सहायक आचार्य डॉ. आलोक कुमार तिवारी ने कहा कि मातृभाषा में पढ़ाई अच्छी पहल है, लेकिन बहुभाषी क्षेत्रों में भाषा चयन को लेकर असमंजस हो सकता है। डिजिटल शिक्षा पर जोर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहाँ इंटरनेट और डिवाइस की कमी है।








