
गोरखपुर। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भूमि राष्ट्र की भौतिक पहचान है, लेकिन विचारधारा भी उतनी ही जरूरी है जितना शरीर के लिए खून। उन्होंने चेताया कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन के साथ सीमा विवाद की है। दुश्मन परमाणु हथियारों से लैस हैं और युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा है।
गोरखनाथ मंदिर में सुरक्षा से जुड़ा सेमिनार
जनरल चौहान शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित “भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां” विषयक सेमिनार में पहुंचे थे। सीएम योगी आदित्यनाथ भी इस दौरान मौजूद रहे। यह सेमिनार हर साल महंत दिग्विजयनाथ और अवैद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित किया जाता है।
चार तरह के खतरे और तीन घेरे की सुरक्षा
CDS ने कहा—
राष्ट्र के सामने चार तरह के खतरे होते हैं: आंतरिक, बाहरी, बाहरी सहयोग से उत्पन्न आंतरिक और आंतरिक सहयोग से उत्पन्न आंतरिक खतरे।
सुरक्षा को तीन घेरे में देखा जा सकता है: सैनिक तत्परता, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र सुरक्षा।
आत्मनिर्भरता और रक्षा अनुसंधान को जोड़कर ही सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सकता है।
चीन-पाकिस्तान सबसे बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से सीमा विवाद पर कई युद्ध हुए हैं और चीन के साथ विवाद सबसे बड़ी चुनौती है। पाकिस्तान से भी खतरा बना हुआ है, जबकि पड़ोसी देशों में अस्थिरता भारत को प्रभावित करती है।
बदलता युद्ध का स्वरूप
जनरल चौहान ने कहा कि युद्ध और राजनीति को अलग नहीं देखा जा सकता।
उरी हमले के बाद भारत ने जमीनी मार्ग से जवाब दिया।
पुलवामा के बाद एयर स्ट्राइक हुई।
बालाकोट ऑपरेशन के बाद लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों पर काम हुआ।
उन्होंने कहा कि अब नभ, जल, थल के साथ साइबर स्पेस और रोबोटिक्स भी नए युद्धक्षेत्र हैं। भविष्य में स्पेस सर्विलांस और एयर डिफेंस को और मजबूत करना होगा।
सुदर्शन चक्र मिशन का जिक्र
CDS ने बताया कि सुदर्शन चक्र मिशन मल्टी डिफेंस टूल होगा, जो हमले का जवाब देने के साथ लोगों की रक्षा भी करेगा। यह भारत में ही विकसित किया जाएगा।
सीएम योगी ने कहा— धरती से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं
कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत माता के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा—
“भारतवासी सुख की नींद इसलिए सोते हैं क्योंकि सैनिक सीमाओं पर कठिन हालात में डटे रहते हैं।”
गोरखा म्यूजियम में भी शामिल हुए
CDS गुरुवार को गोरखा वॉर मेमोरियल और गोरखा म्यूजियम के शिलान्यास समारोह में भी शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और डिनर भी वहीं किया।








