“भूमि का टुकड़ा नहीं, विचारों का समुच्चय है राष्ट्र” — स्वामी ओम प्रकाश

अम्बेडकरनगर (हजपुरा)। “राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं होता, यह एक विचार, एक आचार, एक सभ्यता और परंपरा का जीवंत स्वरूप है।” यह विचार शुक्रवार को टांडा तहसील क्षेत्र के ग्राम दायमपुर में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ एवं ‘अखंड भारत संकल्प विचार गोष्ठी’ में मिशन योगी अगेन सीएम संगठन के प्रदेश संयोजक एवं पूर्व वायुसेना अधिकारी स्वामी ओम प्रकाश ने व्यक्त किए।

सनातन संस्कृति ही राष्ट्र की आत्मा

स्वामी ओम प्रकाश ने कहा कि भारत की पहचान सनातन संस्कृति से है। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति किसी व्यक्ति, पैगंबर या किसी गॉड के बेटे द्वारा स्थापित नहीं की गई, बल्कि जब से सृष्टि है, तब से यह परंपरा चल रही है। श्रीराम और श्रीकृष्ण सनातन धर्म में प्रकट हुए, उन्होंने मार्गदर्शन किया, लेकिन धर्म की नींव पहले से ही मौजूद थी।

उन्होंने कहा कि विश्व में भारत ही एकमात्र देश है, जिसने सात्विकता को राष्ट्रवाद से जोड़ा है। यही कारण है कि भारतीय दर्शन और संस्कृति में आतंकवाद या असहिष्णुता के लिए कोई स्थान नहीं है।

व्यवहारिक सनातन का दिया संदेश

सभा को संबोधित करते हुए स्वामी ओम प्रकाश ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन पद्धति है। उन्होंने जीवन के दैनिक व्यवहार से जुड़े संस्कारों की चर्चा करते हुए कहा कि – प्रातः उठते समय हथेलियों को देखना]धरती को छूकर प्रणाम करना]इष्ट का ध्यान करना]माता-पिता के चरण स्पर्श करना] शौच दिशा का ध्यान रखना
परंपरागत चिन्ह जैसे शिखा, चंदन, जनेऊ धारण करना — ये सभी व्यवहारिक सनातन के अंग हैं।

उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए योग के विविध रूपों — राज योग, प्राण योग, वरुण योग, ज्ञान योग, मस्तिष्क योग — का विस्तार से उल्लेख किया।

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