
अम्बेडकरनगर। जामिया अरबिया इजहारुल उलूम के पूर्व शेखुल हदीस और प्रधानाचार्य, मेमारे मिल्लत अल्लामा अल्हाज अश्शाह मोहम्मद कौसर खां नईमी अलैहिर्रहमा की याद में उनका 14वां साला उर्स शनिवार को पूरे अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया।कार्यक्रम की अगुवाई मेमारे मिल्लत इंतेजामिया कमेटी ने की। उर्स का आगाज़ सुबह नमाज-ए-फज्र और कुरआन ख्वानी से हुआ।
गुलपोशी और चादरपोशी की रस्म अदा, उमड़ा जनसैलाब
नमाज-ए-असर के बाद जायरीन द्वारा मजार शरीफ पर चादरपोशी और गुलपोशी की रस्म अदा की गई।देशभर से आए अकीदतमंदों ने मेमारे मिल्लत की दीनदारी, इल्मी खिदमात और समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए उनकी मजार पर हाजिरी दी।
नमाज-ए-मगरिब के बाद आयोजित लंगर-ए-आम में हजारों लोगों ने शिरकत की और भाईचारे का पैगाम दिया।
जलसे में गूंजे नात और कलाम, हुआ रोशनी से नूर
नमाज-ए-इशा के बाद पीर-ए-तरीकत मखदूमे मिल्लत हजरत मौलाना सैय्यद अवेस मुस्तफा (बिल्ग्राम शरीफ) की सरपरस्ती में भव्य जलसा आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन मौलाना याकूब नईमी (कार्यवाहक प्रधानाचार्य) और शहजादे मेमारे मिल्लत मौलाना मोहम्मद जीलानी नईमी ने किया।
विशेष अतिथि सैय्यद मुजतबा हसन ने भी अपनी मौजूदगी से जलसे को रोशन किया।
कुरआन तिलावत कारी अल्ताफ हुसैन बरकाती ने की। इसके बाद कारी अशहर अज़ीज़ी, मौलाना शहबाज मिस्बाही, समीर रजा इलाहाबादी और हेलाल टांडवी ने नात और कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंगों से भर दिया।
मुफ्ती और उलेमा ने दी श्रद्धांजलि, बताया समाज सुधारक
मुफ्ती एहतेशाम कादरी और मौलाना मोहम्मद अहमद बरकाती ने अपने संबोधन में कहा कि नईमी साहब सिर्फ एक आलिम-ए-दीन नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक, शिक्षाविद् और उम्मत के मार्गदर्शक थे।उन्होंने समाज को शिक्षा और सेवा का पैगाम दिया जिसे आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है।








