
- जिलाधिकारी ने तुरंत लाइसेंस रद्द करने और अस्पताल सील करने की मंजूरी दी
- जिले में कई अल्ट्रासाउंड सेंटर बिना लाइसेंस चल रहे, नोटिस जारी कर मशीनें जमा करने के आदेश
- सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल: सरकारी डॉक्टर निजी अस्पताल में काम नहीं कर सकते
अंबेडकरनगर। जिले में पहली बार स्वास्थ्य विभाग के एक डॉक्टर पर सरकारी पद पर रहते हुए निजी अस्पताल संचालित करने का आरोप लगते ही कड़ी कार्रवाई हुई है। टांडा के छज्जापुर स्थित साबिरा मेडिकल सेंटर का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है और अस्पताल को सील करने की अनुमति भी दी गई है। साथ ही, गोंडा जिले में तैनात डॉक्टर की आठ वर्ष तक ड्यूटी से गैरहाजिरी की जांच भी जारी है।
सरकारी डॉक्टर का प्राइवेट अस्पताल संचालित करने पर बड़ी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया के दौरान टांडा के साबिरा मेडिकल सेंटर में जांच की गई। पता चला कि डॉ. गुलरेज अहमद, जो कि पहले अयोध्या मंडलीय चिकित्सालय में तैनात थे, अपनी सरकारी ड्यूटी के दौरान भी इस निजी अस्पताल और अल्ट्रासाउंड सेंटर का संचालन कर रहे थे। 13 जून 2017 को उनका तबादला गोंडा जिले में हुआ, लेकिन वे आठ वर्षों तक गोंडा में ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और अस्पताल का संचालन जारी रखा।
जांच में मिले गंभीर आरोप, जिलाधिकारी ने दी कार्रवाई की मंजूरी
बार-बार नोटिस और चेतावनी मिलने के बावजूद डॉ. गुलरेज अहमद गोंडा में पदभार ग्रहण करने नहीं पहुंचे। जांच में यह भी पाया गया कि वे स्वयं अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच कराते थे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और केंद्र को सील करने की मंजूरी दे दी।








