
लखनऊ। लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को बुधवार को जया प्रकाश नारायण नेशनल कन्वेंशन सेंटर (JPNIC) के बाहर कड़े सुरक्षा इंतज़ाम के कारण परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिली — गेट बंद, टिन-शेड की दीवार और बैरिकेडिंग से प्रवेश के सभी रास्ते रोके गए थे।
सुरक्षा क्यों कड़ी की गई — प्रशासन का रुख
प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और संभावित अव्यवस्था के हवाले से JPNIC के प्रवेश मार्गों को बंद कर दिया। इसी साल जुलाई में राज्य सरकार ने JPNIC का प्रबंधन लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी (LDA) को सौंपने का निर्णय भी लिया था, जिससे केंद्र के संचालन और निर्माण को लेकर सियासी बहसें तेज रहीं।
अखिलेश का संदेश और आश्वासन
सपा प्रमुख ने कहा कि जयप्रकाश नारायण के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाजवादी आदर्शों पर चलकर ही देश खुशहाल बन सकता है। उन्होंने JPNIC के राजनीतिक और प्रबंधन विवादों को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि अगर सरकार चाहे तो सपा वह केंद्र खरीद कर उसे बचाएगी — “हम लोग संकल्प लेते हैं कि JPNIC को बिकने नहीं देंगे।”
पार्टी शैली और प्रतिक्रिया
पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्रवाई को लोकतांत्रिक गतिविधियों पर पाबंदी करार दिया। सपा ने कहा कि हर साल जेपी जयंती पर उनके JPNIC जाने और वहां रोक-टोक को लेकर नाटकीय घटनाक्रम सामने आते रहे हैं — इस बार भी यही मामला दोहराया गया। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह राजनीति में बाधा डालने की नיטि का हिस्सा है।
JPNIC का रोना — अधूरा, विवादित और प्रशासनिक फेरबदल
JPNIC परियोजना लंबे समय से अधर में रही है; निर्माण कार्य में देरी, लागत वृद्धि और उठे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर CAG रिपोर्ट और जांच के आदेशों के हवाले से विवाद रहे हैं। इसी कारण सरकार ने हालिया कैबिनेट बैठक में इसका संचालन LDA को सौंपने का फैसला किया — जिससे केंद्र के भविष्य व सार्वजनिक उपयोग पर सवाल उठे हैं।
निगाहें आगे की राजनीतिक लड़ाई पर
JPNIC का मसला अब केवल भावनात्मक श्रद्धांजलि का नहीं बल्कि लोक-रणनीति और प्रशासन-प्रतिपक्ष टकराव का प्रतीक बन गया है। सपा इसे लोकतांत्रिक अधिकार और लोकनायक की विरासत बचाने का मामला बता रही है, जबकि पुलिस और प्रशासन सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और केंद्र के संचालन के औपचारिक पक्ष का हवाला दे रहे हैं।








