
- ASI पर हिंदुओं के साथ दोगले व्यवहार के आरोप
- 7 फीट ऊंची खंडित भगवान विष्णु मूर्ति के सामने प्रार्थना
- राकेश किशोर ने 1958 के एक्ट में बदलाव की मांग की
खजुराहो। दिल्ली के वकील डॉ. राकेश किशोर कुमार, जिन्होंने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंका था, दो दिन से खजुराहो में हैं। बुधवार सुबह करीब 10 बजे उन्होंने जवारी मंदिर में प्रार्थना की और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) पर आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदुओं के साथ दोगला व्यवहार किया जा रहा है।
राकेश किशोर ने बताया कि वे CJI गवई के कहने पर ही मंदिर आए थे और मूर्ति के सामने ध्यान किया। मंदिर में उनके साथ राम राज मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज ऋषि राजेंद्र सिंह नरूका, श्री कृष्ण जन्मभूमि केस मथुरा के मुख्य पक्षकार कौशल किशोर ठाकुर, सनातन धर्म रक्षा पीठ वृंदावन के पीठाधीश्वर और गाजियाबाद डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती भी मौजूद रहे।
ASI ने अनुमति न होने की बात कही
ASI अधिकारी दीक्षांत चावरे और सुरक्षा कर्मी मंदिर में उपस्थित थे। पूजा के बाद उन्होंने सभी को मंदिर खाली करने के लिए कहा। चावरे ने मीडिया से कहा कि खजुराहो के स्मारक आम पर्यटकों के लिए खुले हैं, लेकिन पूजा, ध्यान या योग करने की अनुमति नहीं है। राकेश किशोर या उनके सहयोगियों ने किसी भी गतिविधि के लिए परमिशन नहीं ली थी।
राकेश किशोर की मांगें और बयान
जवारी मंदिर के गर्भगृह में 7 फीट ऊंची भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा के सामने प्रार्थना के बाद राकेश किशोर ने कहा कि वे मूर्ति की पुनर्स्थापना और अपनी मांगें पूरी होने के बाद ही माल्यार्पण करेंगे। उन्होंने ASI पर सवाल उठाते हुए कहा कि मूर्तियों की पुनर्स्थापना पहले करनी चाहिए, उसके बाद कानून लागू होना चाहिए।
राकेश किशोर ने कहा:
- मूर्ति खंडित नहीं होती, मानसिकता खंडित होती है।
- मूर्ति को पूजा योग्य बनाने के लिए शीश जोड़ें और बगल में छोटी मूर्ति स्थापित करें।
- उन्होंने भोजपुर मंदिर और संभल मस्जिद के उदाहरण देते हुए ASI की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
- 1958 में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए एक्ट को बदलने की आवश्यकता बताई।








