अंबेडकरनगर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बसखारी में फर्जी हस्ताक्षर के गंभीर मामले पर तीन माह बीत जाने के बाद भी विभागीय कार्रवाई न होने से सवाल उठने लगे हैं। शिकायत के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और धीमी जांच की प्रक्रिया ने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि मामला जानबूझकर दबाया जा रहा है।
स्थायी स्टाफ नर्स के हस्ताक्षर से की गई जालसाजी
सूत्रों के अनुसार, सीएचसी बसखारी में तैनात एक स्थायी स्टाफ नर्स के हस्ताक्षर जालसाजी से किए गए थे। यह मामला उस समय उजागर हुआ जब संबंधित दस्तावेजों पर संदेहास्पद हस्ताक्षर पाए गए। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हस्ताक्षर स्टाफ नर्स के नहीं थे, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए थे।
मामले की जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई गई। प्रारंभिक शिकायत पर जांच के आदेश दिए गए थे, लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ पाई। विभागीय स्तर पर अब तक किसी भी कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई है।
विभागीय चुप्पी पर बढ़ा संदेह
मामले को लेकर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर जांच को जानबूझकर लंबित किया जा रहा है। जांच अधिकारी द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा है कि मामले को विभागीय संरक्षण में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, ताकि दोषियों को बचाया जा सके।
सूत्रों का कहना है कि संबंधित फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा और केवल औपचारिकता के तौर पर जांच की कार्यवाही दिखाई जा रही है। इस कारण स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।








