
16 वर्षीय बेटे ने खोया पिता का सहारा, कहा—“अब मेरे सपने कौन पूरे करेगा?”
अंतिम संस्कार में असम राइफल और पांच मराठा राइफल के जवानों ने सलामी दी
प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों में रोष
अंबेडकरनगर। असम राइफल के जवान मनोज उपाध्याय उर्फ पिंटू का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह उनके पैतृक गांव देवरियालाल पहुंचा। गांव में जवान को अंतिम विदाई देने के लिए भारी भीड़ जुटी रही। चांडीपुर घाट पर उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। असम राइफल और पांच मराठा राइफल के जवानों ने सलामी दी और नम आंखों से अपने साथी को अंतिम विदाई दी।
परिवार पर दूसरी बड़ी चोट, मासूम बेटा बोला—अब मेरे सपने कौन पूरे करेगा
अंतिम संस्कार के दौरान परिवार का करुण दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।
मनोज के 16 वर्षीय बेटे तुषार उर्फ चाहत ने रोते हुए बताया कि बुधवार शाम चार बजे पिता से आखिरी बार बात हुई थी। मनोज ने उसे बताया था कि हल्का जुकाम-सर्दी है और 24 नवंबर को फ्लाइट से घर आने वाले हैं।
तुषार ने कहा—“पापा हमेशा कहते थे मेहनत से पढ़ो, अफसर बनो… अब मेरे सपने कौन पूरे करेगा?”
बेटी नियति (13) और पत्नी रानी उपाध्याय स्थिति संभाल नहीं पा रहीं थीं और बार-बार बेहोश होकर गिर रहीं थीं।
महज एक वर्ष पहले परिवार ने पिता चंद्रभूषण उपाध्याय को खोया था, और अब दूसरा बड़ा सहारा भी चला गया।









