
पूर्व सांसद धनंजय सिंह से नजदीकियों के संकेत
रियल एस्टेट और फर्जी फर्मों में करोड़ों की जांच
ईडी-STF की संयुक्त पूछताछ में बड़े खुलासे की उम्मीद
लखनऊ। लखनऊ में मंगलवार को एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले ही उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, आलोक विदेश भागने की फिराक में था।
आलोक सिंह का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब कफ सिरप की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के दौरान उसके संबंध कई बाहरी और राजनीतिक प्रभाव वाले व्यक्तियों से सामने आए। पूर्वांचल के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ उसकी कई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं।
सरेंडर की तैयारी का दावा—लेकिन STF ने पहले ही दबोचा
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आलोक सिंह ने दावा किया कि वह कोर्ट में सरेंडर करने जा रहा था और इसके लिए आवेदन भी दायर किया गया था। हालांकि, इससे पहले ही एसटीएफ ने उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया।
कफ सिरप तस्करी मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं—
- 27 नवंबर: अमित सिंह उर्फ अमित टाटा
- 30 नवंबर: भोला जायसवाल
- 3 दिसंबर: आलोक सिंह
2006 से शुरू हुआ विवादों का सिलसिला
आलोक सिंह की विवादित छवि नई नहीं है। उसका पैतृक घर चंदौली में है, जबकि लखनऊ के नाका मोतीनगर में भी आवास है।
साल 2006 में प्रयागराज के एक कारोबारी से 4 किलो सोना लूटने के मामले में आलोक समेत 5 पुलिस कर्मियों और 2 नागरिकों को आरोपी बनाया गया था। इसमें दरोगा संतोष सिंह, बृजनाथ यादव, क्राइम ब्रांच सिपाही सुशील पचौरी, आलोक सिंह, संतोष तिवारी, नीरज गुप्ता और सुभाष के नाम थे।
पुलिस ने शुरुआत में 3 किलो सोना बरामद करने का दावा किया था। इसी प्रकरण के बाद आलोक और सुशील को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि कोर्ट में मामला जाने पर आलोक के पक्ष में निर्णय आया और 27 सितंबर 2022 को उसे सेवा में पुनः बहाल कर दिया गया।
धनंजय सिंह से नजदीकियां और रियल एस्टेट के जरिए करोड़ों कमाए
सेवा में वापसी के बाद आलोक पर फिर कई आरोप लगे। नाका क्षेत्र में एक व्यापारी से लूट के मामले में उसे लाइन हाजिर किया गया। इसी दौरान उसकी नजदीकियां बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह से बढ़ी।
धीरे-धीरे आलोक रियल एस्टेट, फर्जी कंपनियों और अन्य कारोबार के जरिए काफी प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत हो गया।
2019 में भी धनंजय सिंह और आलोक पर आरोप लगा था कि उन्होंने हजरतगंज में मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधियों पर जानलेवा हमला किया था।








