
बर्खास्त सिपाही आलोक और अमित टाटा कोडीन सिरप तस्करी में शामिल
5-5 लाख रुपए निवेश, 22-22 लाख रुपए का मुनाफा
फरार सरगना शुभम जायसवाल को ED ने नोटिस चिपकाया
लखनऊ। कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह लगभग 2 साल पहले इस धंधे में शामिल हुए थे। इस दौरान उनका निकनेम ‘STF’ पड़ गया था।
जांच में सामने आया कि आलोक और अमित टाटा ने इस तस्करी में शुरुआती तौर पर 5-5 लाख रुपए निवेश किए। इसके बाद उन्हें 22-22 लाख रुपए का मुनाफा मिला। इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था शुभम जायसवाल, जो फिलहाल फरार है।
बुधवार को ED की टीम ने शुभम के घर पर नोटिस चिपकाया और उसे 8 दिन के अंदर तलब होने का निर्देश दिया। अधिकारियों के अनुसार, इस धंधे में कोडीनयुक्त कफ सिरप की कीमत में 8 से 10 गुना अधिक काली कमाई होती थी।
नेटवर्क का विस्तार और मुनाफा
पहली ही बार में चार गुना मुनाफा मिलने के बाद, आलोक और अमित ने लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर और धनबाद में इस नेटवर्क को और मजबूत किया। सूत्रों के अनुसार, जो सिरप कंपनी से 100 रुपए में आता था, वही नशे के बाजार में 800 से 1000 रुपए में बिकता था। इस मुनाफे को सिंडिकेट के सदस्य आपस में बांटते थे।
जांच एजेंसियों का खुलासा
STF और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग के अफसरों से बातचीत में यह पता चला कि यह धंधा काफी संगठित तरीके से संचालित किया गया। नेटवर्क में फर्जी मेडिकल फर्म और कागजी दस्तावेजों का जाल बिछाया गया था, जिससे असली सिरप सीधे नशे के बाजार में पहुंचता था।
ED की कार्रवाई और जांच जारी है, जबकि शुभम जायसवाल की गिरफ्तारी के लिए दबिश बढ़ा दी गई है।








