अवैध पार्किंग से फीकी पड़ रही रूमी गेट की पहचान

लखनऊ। लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान रूमी गेट अवैध पार्किंग के चलते अपनी खूबसूरती खोता जा रहा है। खासकर वीकेंड के दौरान हालात ऐसे हो जाते हैं कि यहां पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। दिल्ली, गुरुग्राम समेत देश के कई हिस्सों से आने वाले पर्यटक जब रूमी गेट पहुंचते हैं, तो उन्हें जाम और बेतरतीब पार्किंग का सामना करना पड़ता है।

पर्यटकों का कहना है कि वे लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतों के साथ यादगार तस्वीरें लेने के इरादे से यहां आते हैं, लेकिन मौके पर हालात निराशाजनक मिलते हैं। एक पर्यटक ने बताया,
“हम सोचकर आए थे कि रूमी गेट के सामने खूबसूरत सेल्फी लेंगे, लेकिन हर तरफ बस, कार और ई-रिक्शा खड़े हैं। फोटो में ऐतिहासिक इमारत की जगह गाड़ियां ही नजर आती हैं।”

पार्किंग के नाम पर वसूली
पर्यटकों के मुताबिक रूमी गेट के आसपास भारी संख्या में वाहन पार्क कराए जा रहे हैं और इसके बदले पार्किंग शुल्क भी वसूला जा रहा है। कार के लिए ₹30 और बस के लिए ₹100 पार्किंग फीस ली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पार्किंग की पर्ची पर किसी भी अधिकृत संस्था या विभाग का नाम दर्ज नहीं होता, जिससे इसकी वैधता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

डेढ़ करोड़ से हुआ था रेनोवेशन
गौरतलब है कि रूमी गेट का 2022 से नवंबर 2024 तक व्यापक रेनोवेशन कराया गया था, जिस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए। रूमी गेट, बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा और पिक्चर गैलरी जैसी ऐतिहासिक इमारतें हुसैनाबाद ट्रस्ट की देखरेख में आती हैं। इनके संरक्षण और सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की लखनऊ शाखा ने संभाली थी।

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