अहिरौली गोबिंद साहब स्थित महात्मा गोबिंद साहब की तपोस्थली पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले को राजकीय मेला घोषित कराने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों में शुमार इस मेले को पर्यटन केंद्र घोषित कर विधिवत सौंदर्यीकरण कराए जाने की भी मांग उठ रही है। मेला समिति, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, किसानों और क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से सदियों पुरानी परंपराओं को यथावत बनाए रखने की अपील की है।
माह भर तक चलता है पूर्वांचल का ख्यातिलब्ध मेला
प्रति वर्ष महात्मा गोबिंद साहब की तपोस्थली अहिरौली गोबिंद साहब में माह भर तक चलने वाला यह मेला पूर्वांचल का ख्यातिलब्ध ऐतिहासिक मेला माना जाता है। आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, गोरखपुर, मऊ, कुशीनगर, महाराजगंज, देवरिया, संतकबीरनगर, बस्ती, अयोध्या, सुल्तानपुर, बाराबंकी, अमेठी, बलरामपुर, गोण्डा, श्रावस्ती, बहराइच सहित कई अन्य जनपदों से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालु गोविंद सरोवर में स्नान कर महात्मा गोबिंद साहब की समाधि पर मत्था टेकते हैं और खिचड़ी चढ़ाते हैं।
व्यापार और किसानों की आय का प्रमुख केंद्र
मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों दुकानदार पहुंचते हैं, जो विविध प्रकार की दुकानें लगाते हैं। मीठा-नमकीन, खजला और लाल गन्ना मेले का प्रमुख प्रसाद और आकर्षण रहता है। खजले सहित अन्य सामग्रियों से जहां दुकानदारों की आय होती है, वहीं लाल गन्ने की बिक्री मेला क्षेत्र के आसपास के दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनती है।








