आस्था, संस्कृति और लोककलाओं के संगम ने रचा ऐतिहासिक अंतिम दिवस

तमसा तट पर आरती और सांस्कृतिक संध्या ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया

शास्त्रीय गायिका रश्मि मालवीय जोश की प्रस्तुति ने बांधा समां

भरतनाट्यम, कथकली, कुचीपुड़ी और मोहिनीअट्टम ने दिखाया दक्षिण भारतीय नृत्य का सौंदर्य

अम्बेडकरनगर। जनपद के विकास खंड कटेहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत चिउटीपारा स्थित महात्मा श्रवण कुमार की निर्वाण स्थली पर आयोजित तीन दिवसीय श्रवण धाम महोत्सव–2026 का समापन मंगलवार को भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामय रूप से संपन्न हुआ। अंतिम दिवस पर तमसा तट आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के संगम का साक्षी बना। तमसा आरती के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला ने श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों को देर रात तक बांधे रखा।

तमसा तट पर आरती से हुई सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत

अंतिम दिवस की शुरुआत पावन तमसा नदी के तट पर आयोजित तमसा आरती से हुई। दीपों की पंक्तियों और मंत्रोच्चार के बीच वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। आरती के उपरांत सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ हुआ, जिसमें देश की विविध कलात्मक परंपराओं की प्रभावशाली झलक देखने को मिली।

शास्त्रीय संगीत ने बांधा समां

तमसा आरती के बाद प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका रश्मि मालवीय जोश ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। उनकी गायकी में प्रस्तुत रागों की शुद्धता और बंदिशों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संपूर्ण परिसर शास्त्रीय सुरों से गूंज उठा और भारतीय संगीत परंपरा की समृद्ध विरासत का सजीव अनुभव कराया।

दक्षिण भारतीय नृत्य शैलियों की मनोहारी प्रस्तुतियां

इसके उपरांत कला क्षेत्र फाउंडेशन के कलाकारों ने दक्षिण भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मंच पर जीवंत किया। भरतनाट्यम, कथकली, कुचीपुड़ी और मोहिनीअट्टम सहित विभिन्न नृत्य शैलियों की जुगलबंदी ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। भाव-भंगिमाओं, मुद्राओं और ताल-लय के सटीक समन्वय ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

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