
लखनऊ। Allahabad High Court Lucknow Bench ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मेडिकल क्लेम को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि इलाज के दौरान लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है या वह स्वयं दावा करने की स्थिति में नहीं रहता, तो उसके कानूनी वारिस भी मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का दावा कर सकते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति Justice Alok Mathur और Justice Amitabh Kumar Rai की खंडपीठ ने चंद्र चूड़ सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
मामला एक सेवानिवृत्त डिप्टी रजिस्ट्रार के इलाज से जुड़ा था, जिनका Lucknow के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। उनके पुत्र ने इलाज में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि नियमों के अनुसार केवल “लाभार्थी” ही क्लेम कर सकता है। राज्य सरकार ने अपने पक्ष में Uttar Pradesh Government Servant Medical Attendance Rules 2011 का हवाला दिया था।
हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि नियमों की ऐसी व्याख्या उचित नहीं है, जो मृतक के परिवार को उनके वैध अधिकार से वंचित कर दे। पीठ ने माना कि यदि लाभार्थी जीवित नहीं है, तो उसके कानूनी उत्तराधिकारी को मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति का अधिकार मिलना चाहिए। यह फैसला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में न्याय मिलना आसान होगा।








