तमसा तट पर श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ

अंबेडकरनगर। शहर के तमसा नदी तट प्रांगण में शनिवार से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन शुरू हुआ। कार्यक्रम का आयोजन दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से किया गया। प्रथम दिवस पर कथा व्यास साध्वी भाग्यश्री भारती ने कथा का माहात्म्य विस्तार से बताया।

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि वेद और पुराण भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। वेद व्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण जीवन के मूल सिद्धांतों को समझाने वाला ग्रंथ है। उन्होंने भीष्म पितामह के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अंतिम समय में परमात्मा का स्मरण करते हुए देह त्याग की। इससे यह संदेश मिलता है कि जीवन के साथ मृत्यु भी सार्थक हो सकती है, यदि व्यक्ति ईश्वर के ज्ञान को समझे।

परीक्षित प्रसंग का उल्लेख करते हुए साध्वी ने कहा कि कलियुग के प्रारंभ में भी त्रुटियां हुईं। वर्तमान समय में इसके प्रभाव अधिक दिखाई दे रहे हैं। समाज में बढ़ते अधर्म और अव्यवस्था का जिक्र करते हुए उन्होंने सही मार्गदर्शन की आवश्यकता बताई।

कथा के प्रथम दिवस पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। 

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