क्यों घिरा केंद्र का नया प्रस्ताव?

क्या है 850 सीटों का प्लान, कैसे बढ़ा विपक्ष का विरोध

  • महिला आरक्षण और सीट बढ़ाने पर विपक्ष की बैठक
  • 16-18 अप्रैल के विशेष सत्र में आएंगे 3 बिल
  • लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव

नई दिल्ली। नई दिल्ली में बुधवार को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित महिला आरक्षण बिल और लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर रणनीति बनाने के लिए बैठक की। यह बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई, जिसमें राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए।

बैठक में तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उद्धव गुट), एनसीपी (शरद गुट) और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

क्या है केंद्र सरकार का प्रस्ताव

केंद्र सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में तीन अहम बिल पेश करने जा रही है।

इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) 2026 शामिल हैं।

सरकार का प्रस्ताव लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का है, जिसमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

विपक्ष क्यों कर रहा विरोध

विपक्षी दलों का कहना है कि सीटों में बढ़ोतरी से प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक फायदे के लिए ला रही है।

वहीं एम.के. स्टालिन ने आशंका जताई कि इससे दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा।

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

के.टी. रामाराव (KTR) ने कहा कि परिसीमन प्रक्रिया में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा जरूरी है।

विजय ने कहा कि महिला आरक्षण का स्वागत है, लेकिन सीटों का पुनर्वितरण क्षेत्रीय असंतुलन बढ़ा सकता है।

राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार 2029 चुनाव को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रही है।

वहीं रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की है।

महिला आरक्षण पर क्या है स्थिति

विपक्षी दलों ने साफ किया कि वे 33% महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन इसे मौजूदा 543 सीटों में ही लागू किया जा सकता है।

उनका मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी नहीं है।

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