
अंबेडकर नगर में शनिवार को आयोजित तहसील समाधान दिवस में बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आईं, लेकिन मौके पर निस्तारण का आंकड़ा सीमित रहा। अधिकांश मामलों में शिकायतकर्ताओं को तत्काल राहत नहीं मिल सकी। शेष प्रार्थना पत्रों को विभागों के पास भेजकर औपचारिक कार्रवाई की गई।
अकबरपुर में 115 शिकायतें, केवल 10 का निस्तारण
तहसील अकबरपुर में सबसे अधिक 115 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से सिर्फ 10 मामलों का ही मौके पर निस्तारण हो सका। बाकी 100 से अधिक मामलों में फरियादियों को तत्काल समाधान नहीं मिला।
अन्य तहसीलों में भी यही स्थिति
तहसील भीटी में 47 शिकायतें आईं, लेकिन केवल 6 का ही निस्तारण किया गया। टांडा में 30 में से 2 मामलों का समाधान हुआ। आलापुर में 66 शिकायतों में से 8 और जलालपुर में 105 में से केवल 6 शिकायतों का ही मौके पर निपटारा हो पाया।
मौके पर समाधान की दर बेहद कम
आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल शिकायतों की तुलना में मौके पर निस्तारण का प्रतिशत काफी कम रहा। ज्यादातर मामलों में लोगों को सिर्फ आश्वासन मिला और उनकी शिकायतें आगे भेज दी गईं। इससे समाधान दिवस की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
फरियादियों को तत्काल राहत नहीं
समाधान दिवस का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित निस्तारण करना है, लेकिन बड़ी संख्या में आए मामलों के बावजूद मौके पर सीमित कार्रवाई ही हो सकी। कई फरियादियों को विभागीय प्रक्रिया पूरी होने तक इंतजार करना पड़ेगा।
विभागों को दिए गए निर्देश
प्रशासन की ओर से संबंधित विभागों को शिकायतों के शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, मौके पर कम निस्तारण के कारण व्यवस्था की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तहसील समाधान दिवस में बढ़ती शिकायतों और कम मौके पर निस्तारण के बीच संतुलन बनाना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।









