
अंबेडकरनगर के अकबरपुर ब्लॉक में विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर महिलाओं के लिए जलवायु जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जन शिक्षण केंद्र की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) पाती में संचालित “जलवायु जागरूकता और सहभागिता” अभियान के तहत हुआ।
कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं को जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
बढ़ते तापमान पर चिंता
जन शिक्षण केंद्र की सचिव पुष्पा पाल ने कहा कि बदलते मौसम और ग्लोबल वार्मिंग के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में समुद्र तटीय क्षेत्र जलमग्न हो सकते हैं।
रासायनिक दवाओं के सीमित उपयोग की सलाह
पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. शिवम कुमार ने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के सीमित उपयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिक उपयोग से मिट्टी और जल प्रदूषित हो रहे हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता घट रही है। उन्होंने जैविक खाद और पशुपालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
पोषण वाटिका और वर्षा जल संचयन पर बल
उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. लोकेश यादव ने पोषण वाटिका के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि जैविक खेती और वर्षा जल संचयन से जल संकट को कम किया जा सकता है। इससे भूजल स्तर को भी बेहतर किया जा सकता है।
‘जल है तो कल है’ का संदेश
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामजीत ने कहा कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने बताया कि अगर अभी से प्राकृतिक संसाधनों को बचाने पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में गंभीर स्थिति बन सकती है।









