यूरिया संकट के बीच भारत-रूस की बड़ी पहल

समारा में लगेगा 20 हजार करोड़ का फर्टिलाइजर प्लांट

  • भारत-रूस के बीच फर्टिलाइजर प्लांट पर तेजी
  • रूस के समारा में लगेगा 20,000 करोड़ का प्रोजेक्ट
  • सालाना 20 लाख टन यूरिया उत्पादन क्षमता
  • मिडल-ईस्ट से आयात निर्भरता घटाने की कोशिश
  • IPL, RCF और NFL की भागीदारी

नई दिल्ली। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते पैदा हुए यूरिया संकट के बीच India और Russia ने संयुक्त रूप से फर्टिलाइजर प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह प्लांट रूस के समारा क्षेत्र में लगाया जा रहा है, जो अगले दो वर्षों में बनकर तैयार होने की संभावना है।

करीब 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में सालाना 20 लाख टन यूरिया उत्पादन की क्षमता होगी। हाल ही में इस परियोजना को लेकर एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूस का दौरा भी किया है।

मिडल-ईस्ट पर निर्भरता घटाने की रणनीति

भारत अपनी कृषि जरूरतों के लिए नाइट्रोजन आधारित खाद यूरिया पर काफी निर्भर है। फिलहाल देश अपनी जरूरत का लगभग 71% यूरिया मिडल-ईस्ट देशों से आयात करता है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट भारत की आयात निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।

तीन सरकारी कंपनियां और रूस की साझेदारी

इस संयुक्त परियोजना में Indian Potash Limited, Rashtriya Chemicals & Fertilizers Limited और National Fertilizers Limited मिलकर करीब 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।
वहीं, रूस की प्रमुख केमिकल कंपनी Uralchem Group शेष 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।

भारत को मिलेगा स्थायी यूरिया स्रोत

इंडियन पोटाश लिमिटेड के एमडी पी.एस. गहलोत के अनुसार, प्रोजेक्ट कंसल्टेंट Projects and Development India Limited (PDIL) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। यह प्लांट भविष्य में भारत के लिए यूरिया का स्थायी और भरोसेमंद स्रोत साबित होगा।

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