
लखनऊ। दशकों से बदहाली, गरीबी और अति पिछड़ेपन का दंश झेल चुके पूर्वी उत्तर प्रदेश के बाशिंदों के लिये अब दिल्ली दूर नहीं रहेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 16 नवंबर को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उदघाटन करेंगे जिसके साथ ही यह क्षेत्र विकास की नई उड़ान भरने लगेगा।
बिहार सीमा से सटे गाजीपुर से प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच करीब 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के रूप में पूरब के लोगों को तरक्की का ‘गेटवे’ मिल जाएगा। अब तक दिल्ली पहुंचने में गाजीपुर के लाेगों को 20-22 घंटे का समय लगता था जबकि एक्सप्रेस वे के अस्तित्व में आते ही सफर का समय आधे से भी कम हो जायेगा।
अधिकृत सूत्रों ने दावा किया कि योगी सरकार ने यूपी में रोड कनेक्टिविटी को अर्थव्यवस्था के मजबूत प्लेटफार्म के रूप में तैयार किया है। सीएम के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को भी इसी मंशा से विकसित किया गया है। पूर्व की सरकारों में जिन जिलों में पारंपरिक सड़कें ही चलने लायक नहीं थीं, वहां सिक्स लेन एक्सप्रेसवे की सौगात विकास की नई इबारत लिखने जा रही है। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ आमजन की आवागमन सुगमता का ही मार्ग नहीं है बल्कि निवेश व औद्योगिक विकास से रोजगार का भी नया द्वार खोलने वाला है।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के दायरे में आने वाले जनपदों में कारोबारी गतिविधियों को नया विस्तार तो मिलेगा ही, एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ इंडस्ट्रियल क्लस्टर स्थानीय श्रम शक्ति को सेवायोजित भी करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के समीप पांच इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की तरफ से नौ हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित भी कर ली गई है।








