राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी से “सब्जेक्ट गैप” गहराया

विज्ञान और गणित में सबसे बड़ा संकट, कई स्कूलों में पढ़ाई अधूरी

  • विज्ञान, गणित और अंग्रेजी में सबसे ज्यादा खाली पद
  • कई स्कूलों में एक शिक्षक संभाल रहा कई कक्षाएं
  • राजकीय इंटर कॉलेजों से कोई छात्र नहीं बना टॉपर

अम्बेडकरनगर। जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी अब “सब्जेक्ट गैप” के रूप में सामने आ रही है। इसका सीधा असर कक्षा में पढ़ाई की निरंतरता और यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणामों पर पड़ा है। इस बार राजकीय इंटर कॉलेजों से टॉप सूची में कोई भी छात्र जगह नहीं बना सका।

जिले में 32 राजकीय माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 17 हाईस्कूल और 15 इंटरमीडिएट शामिल हैं। लेकिन कई महत्वपूर्ण विषयों में आधे से ज्यादा पद खाली होने के कारण पढ़ाई का ढांचा कमजोर पड़ गया है।

एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का बोझ

हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों में बड़ी कमी दर्ज की गई है। विज्ञान के 32 पदों में सिर्फ 6 शिक्षक कार्यरत हैं। गणित और अंग्रेजी में भी स्थिति लगभग इसी तरह की है। कला और कंप्यूटर जैसे विषयों में कई स्कूलों में नियमित शिक्षक ही नहीं हैं।

स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में एक ही शिक्षक को दो-दो कक्षाओं और अलग-अलग विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।

इंटर स्तर पर कई विषय बिना शिक्षक के

इंटरमीडिएट में स्थिति और गंभीर है। भौतिक विज्ञान के 15 पदों में केवल 1 शिक्षक कार्यरत है। नागरिक शास्त्र जैसे विषय में एक भी शिक्षक नहीं है। गणित, रसायन विज्ञान और अंग्रेजी में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन विषयों में निरंतर पढ़ाई न होने से छात्रों की नींव कमजोर हो रही है, जिसका असर सीधे परीक्षा परिणामों पर दिख रहा है।

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