
- झोलाछाप डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर कार्रवाई की मांग
- स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर लगे वसूली के आरोप
- सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज
बसखारी क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित क्लीनिक, झोलाछाप डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र में लगातार चर्चा है कि कई सेंटर बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय कथित संरक्षण का खेल जारी है।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर कई पोस्ट और आरोप सामने आए हैं। इसके बावजूद अब तक किसी बड़े स्तर की कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
अधीक्षक और बीपीएम पर लगे आरोप
शिकायतकर्ताओं और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसखारी के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार और बीपीएम कमलेश पर अवैध वसूली के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्र में संचालित कुछ निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक सेंटरों से नियमित रूप से धन उगाही की जाती है।
कुछ संचालकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि कार्रवाई और सीलिंग की चेतावनी देकर दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि बाद में कथित समझौते के बाद कार्रवाई रोक दी जाती है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका।
नियमों के उल्लंघन का भी आरोप
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कुछ पंजीकृत अस्पतालों में लगे अल्ट्रासाउंड और डायग्नोस्टिक उपकरणों का इस्तेमाल बाहरी मरीजों की जांच के लिए किया जा रहा है। जबकि नियमों के अनुसार ऐसी सेवाएं निर्धारित मानकों और पंजीकरण शर्तों के तहत ही दी जा सकती हैं।









