
- मौलाना अतहर अब्बास जैदी ने किया खिताब
- इंसानियत, सब्र और इंसाफ का दिया संदेश
- नौहाख्वानी और मातम से गमगीन हुआ माहौल
- बड़ी संख्या में अजादार और उलेमा रहे मौजूद
जलालपुर, अंबेडकरनगर। जलालपुर तहसील क्षेत्र के कटघर कमाल गांव में रविवार को मरहूम सैयद शाहिद हैदर रिजवी के इसाले सवाब के मौके पर आयोजित मजलिस-ए-चेहलुम में अकीदत और गम का माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में अजादारों, उलेमाओं और क्षेत्रीय लोगों ने कार्यक्रम में शिरकत कर मरहूम की मगफिरत के लिए दुआएं कीं। तिलावते कलाम-ए-पाक से शुरू हुई मजलिस में कर्बला की कुर्बानियों और इंसानियत के पैगाम को याद किया गया।
कर्बला सिर्फ एक घटना नहीं, इंसानियत का पैगाम : मौलाना अतहर अब्बास जैदी
मुजफ्फरनगर से पहुंचे मौलाना सैयद अतहर अब्बास जैदी ने मजलिस को खिताब करते हुए दीने इस्लाम, इंसानियत और कर्बला की कुर्बानियों पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इस्लाम अमन, भाईचारे और मोहब्बत का मजहब है, जो इंसान को इंसाफ और सच्चाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है।
मौलाना ने हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन अ.स. की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने दीने इस्लाम की हिफाजत के लिए अपना पूरा कुनबा कुर्बान कर दिया, लेकिन जुल्म और अन्याय के सामने झुकना मंजूर नहीं किया। उन्होंने कहा कि कर्बला का पैगाम आज भी पूरी दुनिया को सब्र, त्याग और इंसाफ की राह दिखाता है।
नई पीढ़ी को दीनी तालीम से जोड़ने पर दिया जोर
मौलाना जैदी ने अपने संबोधन में वर्तमान दौर की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ दीनी तालीम देना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नई नस्ल अगर अपने इमामों की सीरत और कर्बला की कुर्बानियों को समझेगी, तभी समाज में इंसानियत और अखलाक मजबूत होगा।









