
- NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- NTA से गुरुवार तक मांगा हलफनामा
- “पिछले साल से कोई सबक नहीं लिया
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि एजेंसी ने पिछले साल हुए पेपर लीक मामले से कोई सबक नहीं लिया।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि 2024 में भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। उस समय बनाई गई मॉनिटरिंग कमेटी ने कई अहम सिफारिशें दी थीं, जिन्हें स्वीकार भी किया गया था। इसके बावजूद दोबारा ऐसी स्थिति सामने आना गंभीर चिंता का विषय है।
NTA को हलफनामा दाखिल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को निर्देश दिया है कि वह गुरुवार तक हलफनामा दाखिल कर बताए कि 2024 में कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों और मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई।
कोर्ट ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना एजेंसी की जिम्मेदारी है।
29 मई को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA), यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली तारीख 29 मई तय की है।
FAIMA की याचिका में क्या मांग?
FAIMA ने अपनी याचिका में मांग की है कि:
- NEET-UG परीक्षा कराने के लिए NTA की जगह नई और मजबूत स्वायत्त संस्था बनाई जाए।
- जब तक नई व्यवस्था लागू न हो, तब तक हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए।
- कमेटी में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और फॉरेंसिक वैज्ञानिक शामिल किए जाएं।
- परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए।
22 लाख से ज्यादा छात्रों पर असर
याचिका में कहा गया है कि बार-बार पेपर लीक की घटनाओं से 22.7 लाख से अधिक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इससे छात्रों के मौलिक अधिकारों पर भी असर पड़ रहा है।









