अंबेडकरनगर। बच्चा सुनने में सक्षम है या नहीं, इसकी समय रहते पहचान उसके आगे के विकास के लिए अहम है। इसी उद्देश्य से महामाया राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज के नाक, कान एवं गला (ईएनटी) विभाग ने शनिवार को विशेष श्रवण जांच अभियान चलाया। पीडियाट्रिक आईसीयू (पीआईसीयू) और नियोनेटल आईसीयू (एनआईसीयू) में भर्ती 50 बच्चों की सुनने की क्षमता की स्क्रीनिंग की गई। अभियान के जरिए नवजातों और गंभीर रूप से बीमार बच्चों में श्रवण संबंधी समस्या की जल्द पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।
सुनने की समस्या की जल्द पहचान पर जोर
अंतरराष्ट्रीय बधिर सप्ताह के तहत आयोजित अभियान का उद्देश्य बच्चों में सुनने से जुड़ी दिक्कतों का समय रहते पता लगाना था। ईएनटी विभाग के अनुसार, सुनने की क्षमता भाषा और वाणी के विकास, सीखने तथा संवाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में समस्या की जल्द पहचान होने पर जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ परामर्श और आगे की जांच की प्रक्रिया समय से शुरू की जा सकती है।
नवजातों की स्क्रीनिंग क्यों जरूरी
बच्चों में सुनने की समस्या का पता लगाने में देरी होने पर भाषा और संवाद के विकास में कठिनाई आ सकती है। इसलिए शुरुआती अवस्था में श्रवण जांच और जरूरत के अनुसार उचित हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है। अभियान के माध्यम से अभिभावकों और स्वास्थ्यकर्मियों को भी बच्चों की सुनने की क्षमता पर ध्यान देने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने का संदेश दिया गया।
ईएनटी और बाल रोग विभाग का सहयोग
अभियान में मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. मुकेश यादव का मार्गदर्शन रहा। ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार यादव, सहायक आचार्य डॉ. चंद्रभान और डॉ. सुशील कुमार शर्मा ने आयोजन में सहयोग किया। बाल रोग विभाग ने भी अभियान के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।









