लखनऊ। गोसाईगंज स्थित मां चतुर्भुजी देवी मंदिर करीब 300 साल पुराना बताया जाता है। यह मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता के आशीर्वाद से पूरी होती है। मंदिर की स्थापना से जुड़ी कहानी भी लोगों के बीच काफी प्रचलित है।
किसान की बैलगाड़ी से जुड़ी है मंदिर की स्थापना की कहानी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 300 साल पहले एक किसान बैलगाड़ी से माता की प्रतिमा लेकर जा रहा था। रास्ते में बारिश के कारण बैलगाड़ी का पहिया कीचड़ में धंस गया। किसान ने बैलगाड़ी को आगे बढ़ाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नहीं निकल सकी। इसके बाद किसान ने उसी स्थान पर माता की प्रतिमा स्थापित कर दी। मान्यता है कि तभी से यह जगह पूजा-अर्चना का केंद्र बन गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर के आसपास बसे मातन टोला और चतुर्भुजी नगर के नाम भी माता के मंदिर से जुड़े हुए हैं। यहां लखनऊ के अलावा आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
दिन में तीन रूपों में दर्शन देने की मान्यता
मंदिर को लेकर स्थानीय मान्यता है कि मां चतुर्भुजी दिन में तीन अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देती हैं। सुबह मां के शांत स्वरूप, दोपहर में रौद्र रूप और रात में भद्रकाली स्वरूप की मान्यता है। श्रद्धालु इन स्वरूपों को माता की अलग-अलग शक्तियों का प्रतीक मानते हैं।
नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दुर्गा सप्तशती का पाठ, आरती और भजन-कीर्तन होते हैं। अमावस्या और हर महीने की अष्टमी पर भी मंदिर में भक्तों की भीड़ जुटती है। यहां श्रद्धालु स्वयं माता को प्रसाद चढ़ाते हैं। दर्शन के लिए महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग व्यवस्था भी की गई है।
माता को नील लगाने से आंखों की परेशानी दूर होने की मान्यता
मां चतुर्भुजी देवी मंदिर से जुड़ी एक अन्य मान्यता आंखों की परेशानी से संबंधित है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता को नील लगाने से आंखों की समस्या दूर हो सकती है। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है, इसे चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
नवरात्र के दौरान भक्त माता के दर्शन कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। मंदिर में नवविवाहित जोड़े भी दर्शन करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि माता से वैवाहिक जीवन में प्रेम, आपसी समझ और खुशहाली की कामना करने से रिश्तों में मधुरता बनी रहती है। कुछ लोग नए रिश्तों की शुरुआत और उनके सफल होने की प्रार्थना भी करते हैं।









