मुंबई। मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने शहर की बिगड़ती हवा को जहरीला बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जब लाखों लोग प्रदूषण जैसी आपात स्थिति से जूझ रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद कैसे सो सकते हैं?
मुंबई की हवा पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने प्रदूषण के मुद्दे पर नगर निकायों, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और पुलिस को फटकार लगाई। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई में वायु गुणवत्ता की बिगड़ती स्थिति पर नाराजगी जाहिर की।
कोर्ट ने प्रदूषण को गंभीर और आपातकालीन स्थिति बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। अदालत की टिप्पणी शहर में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर केंद्रित रही।
समुद्र की हवा और खुली जगहों के बावजूद बिगड़े हालात
सुनवाई के दौरान जस्टिस गिरीश एस. कुलकर्णी ने कहा कि मुंबई को अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण प्राकृतिक लाभ मिला हुआ है, लेकिन इसके बावजूद शहर की हवा खराब हो रही है।
पीठ ने टिप्पणी की कि मुंबई में समुद्र से आने वाली हवा और खुली जगहें मौजूद हैं। इसके बाद भी लोगों को प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने कहा कि यह स्थिति चौंकाने वाली है और शहर का आसमान साफ रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट की नाराजगी के केंद्र में वे एजेंसियां रहीं, जिनकी जिम्मेदारी शहर में प्रदूषण पर नियंत्रण रखना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। इनमें नगर निकाय, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस शामिल हैं।
अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी जरूरी है।









