जून में GST कलेक्शन 1.94 लाख करोड़ रुपए

सालाना आधार पर 14% बढ़ोतरी- अप्रैल के रिकॉर्ड स्तर से कलेक्शन में कमी, लेकिन आयात से टैक्स संग्रह में 35% की तेज उछाल

नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह के मोर्चे पर सरकार को जून 2026 में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। 1 जुलाई को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में 1.94 लाख करोड़ रुपये का सकल (ग्रॉस) GST कलेक्शन दर्ज किया गया। यह आंकड़ा जून 2025 के 1.71 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, अप्रैल 2026 में बने 2.42 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड GST कलेक्शन की तुलना में जून का संग्रह करीब 20 प्रतिशत कम रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मासिक आधार पर गिरावट के बावजूद सालाना बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि देश में आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं और टैक्स अनुपालन में सुधार जारी है।

आयात से GST संग्रह में 35% की बड़ी बढ़ोतरी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में GST संग्रह में सबसे बड़ा योगदान आयात (इंपोर्ट) से प्राप्त राजस्व का रहा। आयातित वस्तुओं पर मिलने वाला ग्रॉस GST रेवेन्यू सालाना आधार पर 35 प्रतिशत बढ़कर 60,038 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे स्पष्ट होता है कि विदेशों से होने वाले व्यापार और आयात गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई।

वहीं, घरेलू कारोबार से प्राप्त ग्रॉस GST राजस्व भी बढ़ा है। घरेलू लेनदेन से सरकार को 1.34 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.5 प्रतिशत अधिक है।

नेट GST कलेक्शन में भी दर्ज हुई बढ़त

रिफंड समायोजित करने के बाद नेट इंपोर्ट GST कलेक्शन में 42.2 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 45,370 करोड़ रुपये हो गया।

दूसरी ओर, नेट घरेलू GST राजस्व भी 2.6 प्रतिशत बढ़कर 1.17 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह संकेत देता है कि घरेलू बाजार में भी कर संग्रह की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।

अर्थव्यवस्था की सेहत का अहम संकेतक है GST

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, GST कलेक्शन किसी भी देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। अधिक GST संग्रह का मतलब होता है कि बाजार में खरीदारी बढ़ रही है, उद्योगों में उत्पादन तेज है, कारोबार सक्रिय है और करदाताओं द्वारा टैक्स का बेहतर अनुपालन किया जा रहा है।

यही कारण है कि हर महीने जारी होने वाले GST के आंकड़ों पर उद्योग जगत, निवेशकों और अर्थशास्त्रियों की विशेष नजर रहती है।

GST रिफंड और नेट-ग्रॉस कलेक्शन का मतलब

GST व्यवस्था में यदि कोई कंपनी अपनी वास्तविक देनदारी से अधिक टैक्स जमा कर देती है या निर्यात (एक्सपोर्ट) करती है, तो सरकार उसे अतिरिक्त टैक्स वापस करती है। इसे GST रिफंड कहा जाता है।

वहीं, ग्रॉस GST कलेक्शन वह कुल राशि होती है जो सरकार को टैक्स के रूप में प्राप्त होती है, जबकि नेट GST कलेक्शन वह राशि होती है जो रिफंड देने के बाद सरकार के पास बचती है।

1 जुलाई 2017 से लागू हुई थी GST व्यवस्था

भारत में 1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया था। इसके लागू होने के बाद केंद्र और राज्यों के 17 विभिन्न करों तथा 13 उपकरों (सेस) को समाप्त कर एकीकृत कर प्रणाली लागू की गई।

वर्तमान में GST को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है—

  • CGST (केंद्रीय GST): केंद्र सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कर।
  • SGST (राज्य GST): संबंधित राज्य सरकार द्वारा एकत्र किया जाने वाला कर।
  • IGST (एकीकृत GST): अंतरराज्यीय व्यापार और आयात पर लगाया जाने वाला कर, जिसे केंद्र और राज्यों के बीच बांटा जाता है।
  • सेस (Cess): तंबाकू, लग्जरी वस्तुओं जैसे विशेष उत्पादों पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर, जिसका उपयोग विशेष उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

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